• Mon. Aug 17th, 2026

24×7 Live News

Apdin News

E20 पेट्रोल विवाद: पेट्रोलियम मंत्रालय के इनकार पर वित्त मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार की क्या है सलाह?

Byadmin

Aug 17, 2026


जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। देश में ई-20 (20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल) को अनिवार्य किए जाने के बाद आम लोगों, खासकर पुरानी गाड़ियों के मालिकों की चिंताएं जस की तस हैं। ऐसे में वित्त मंत्रालय और पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय के बीच नीतिगत मतभेद साफ नजर आने लगे हैं।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने हाल के हफ्तों में बार-बार दोहराया है कि अब ई-10 की बिक्री दोबारा शुरू नहीं होगी, जबकि वित्त मंत्रालय के प्रमुख आर्थिक सलाहकार (चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर) वी. अनंत नागेश्वरन ने देश के एक प्रमुख समाचार पत्र में एक आलेख लिख कर ई-10 को फिर से उपलब्ध कराने का समर्थन किया है।

नागेश्वरन ने यह आलेख वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (डीएफए) के सलाहकार आकाश पुजारी के साथ मिलकर लिखा है। वैसे इसमें कहा गया है कि आलेख में विचार व्यक्तिगत है। इसके बावजूद वित्त मंत्रालय के उक्त सलाहकारों के विचारों से पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारी असहज हैं।

ई-10 ईंधन को वापस लाने की वकालत

आलेख में कहा कि पुरानी गाड़ियों के लिए ई-10 जैसे कम एथनॉल वाले ईंधन को पेट्रोल पंपों पर वापस लाना चाहिए। उन्होंने लिखा, पंपों पर कम ब्लेंड, जैसे ई-10, को ई-20 के विकल्प के साथ बहाल करने से जनता की ज्यादातर चिंताएं शांत हो जाएंगी, कुल एथनॉल का इस्तेमाल बढ़ने के बजाय कम होगा और मौजूदा गाड़ियों की सुरक्षा होगी।

आलेख में उन्होंने साफ किया कि ई-20 से इंजन खराब होने का जो आरोप सोशल मीडिया पर फैल रहा है, वह मुख्य रूप से गलत है। एथनॉल में पेट्रोल की तुलना में लगभग दो-तिहाई ऊर्जा होती है, इसलिए ई-20 पर माइलेज में करीब 6-7 प्रतिशत की कमी आ सकती है, न कि 30 प्रतिशत जैसा दावा किया जा रहा है।

क्रूड ऑयल आयात बिल घटाने के दावे पर भी सवाल

साथ ही आलेख में एथनॉल मिश्रण से क्रूड तेल आयात बिल घटाने के दावे पर भी परोक्ष तौर पर सवाल उठाया है। कहा है कि तेल आयात बिल 11-12 लाख करोड़ रुपये सालाना का है, ई-20 से सिर्फ 3-4 फीसद आयात बिल पर असर हो सकता है।

इसमें चेतावनी दी कि ई-20 से आगे ई-27 या ई-30 की ओर बढ़ने से पहले जमीन, पानी और फसल पैटर्न पर पड़ने वाले प्रभावों का पूरा आकलन होना चाहिए।

मक्का जैसी फसलों को अनुचित रूप से बढ़ावा देने वाली कीमत और पानी की विकृतियों को ठीक करने तथा खाद्य तेल आयात शुल्क पर पुनर्विचार करने की भी सलाह दी।

ई-0 और ई-10 की वापसी का प्रस्ताव नहीं

इसके ठीक विपरीत, पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने जुलाई में जारी अपने विस्तृत प्रपत्र में और संसद में दिए जवाबों में साफ कहा है कि ई-0 या ई-10 की बिक्री दोबारा शुरू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

मंत्रालय का तर्क है कि ई-20 वैज्ञानिक रूप से मान्य है, आटोमोबाइल उद्योग ने व्यापक परीक्षणों के बाद इसे स्वीकार किया है और यह शुद्ध पेट्रोल या ई-10 से बेहतर ईंधन है।

मंत्रालय ने बताया था कि देशभर में एक लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों, रिफाइनरियों, डिपो और पाइपलाइनों के नेटवर्क में अलग-अलग ग्रेड (शुद्ध पेट्रोल, ई-10 और ई-20) के लिए समानांतर सप्लाई चेन बनाए रखना भारी लॉजिस्टिक चुनौती पैदा करेगा। अभी तक किया गया निवेश बेकार हो सकता है।

By admin