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NEET-UG 2026 परीक्षा विवाद: क्या प्रश्नपत्र तैयार करने वाले शिक्षकों ने ही लीक किए थे सवाल?

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Jul 30, 2026


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले ने देश की सियासत को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। बयानबाजी से लेकर विरोध प्रदर्शन और फिर पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक। इस पूरे मामले में जहां एक ओर परीक्षा व्यवस्था को लेकर कई सारे सवाल खड़े कर दिए। वहीं दूसरी ओर अब इस पूरे मामले में एक बड़ा दावा सामने आया है। 

न्यूज एजेंसी पीटीआई के सूत्रों की माने तो जांच में दावा किया गया है कि नीट परीक्षा में हुई धांधली का जिम्मेदार कोई बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि पेपर सेट करने वाले शिक्षक ही हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रश्नपत्र तैयार करने और उसके अनुवाद की जिम्मेदारी निभाने वाले शिक्षकों ने ही अपनी याददाश्त के सहारे पेपर लीक किया था।

दोहरी जिम्मेदारी की भूल और फिर पेपर लीक

रिपोर्ट में बताया गया है कि बोर्ड ने जिन तीन शिक्षकों को पेपर सेट करने के लिए चुना था, उन्हीं को उस पेपर का मराठी भाषा में अनुवाद करने का जिम्मा भी दे दिया गया था। जिन शिक्षकों पर यह आरोप है, उनके नाम पी.वी. कुलकर्णी (केमिस्ट्री के शिक्षक), मनीषा गुरुनाथ मंधारे (फिजिक्स की शिक्षिका) और मनीषा संजय हवलदार (बायोलॉजी की शिक्षिका) हैं। 

कैसे हुआ पेपर लीक समझिए पूरा खेला

इस बात को ऐसे समझिए कि पेपर तैयार करने के दौरान इन शिक्षकों को एक सुरक्षित माहौल में रखा जाता था, लेकिन नियम के मुताबिक उन्हें हर दिन शाम को अपने घर जाने की अनुमति थी।

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ऐसे में आरोप है कि इन शिक्षकों ने अंतिम रूप से तैयार किए गए प्रश्नों को अपनी याददाश्त में बसा लिया। फिर घर लौटने के बाद इन्होंने उन सवालों को दोबारा लिखकर अपने कोचिंग संस्थानों के कुछ चुनिंदा छात्रों को दे दिया।

परीक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण बताकर दिए सवाल

इतना ही नहीं बताया यह भी जा रहा है कि इन तीनों आरोपी शिक्षकों छात्रों को यह कहकर ये सवाल दिए गए कि ये परीक्षा के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण हैं, हालांकि यह नहीं बताया गया था कि ये सीधे नीट के मुख्य प्रश्न हैं।

कोचिंग से आगे कैसे फैला पेपर? 

जांच में सामने आया कि एक स्थानीय ब्यूटीशियन मनीषा वाघमरे को इन छात्रों से वह प्रश्न बैंक मिल गया। इसके बाद मनीषा ने उन सवालों को टाइप करके एक असली पेपर जैसा रूप दिया और धनंजय निवृत्ती लोखंडे को बेच दिया। इसके बाद दलालों के एक बड़े नेटवर्क ने इस पेपर को कई राज्यों में लाखों रुपये में बेच दिया।

अब आगे क्या होगा?

गौरतलब है कि सीबीआई ने इस पूरी खामी के बारे में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को बता दिया है। एजेंसी अपनी औपचारिक रिपोर्ट में सिफारिश करेगी कि पेपर सेट करने का काम और उसका अनुवाद करने का काम कभी भी एक ही इंसान को न दिया जाए, ताकि आगे से ऐसा कभी न हो सके।

दूसरी तरफ इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने जांच सीबीआई को सौंपी थी, जिसने अब तक मुख्य शिक्षकों और दलालों समेत 13 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

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