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नीदरलैंड्स और बेल्जियम में आगामी एफआईएच विश्व कप से पहले भारतीय हॉकी टीम की नई जर्सी के रंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है.
हॉकी इंडिया ने पुरुष और महिला दोनों टीमों के लिए पारंपरिक नीले रंग की जगह केसरिया रंग की नई जर्सी पेश की जिस पर पूर्व कप्तान विरन रस्किन्हा और परगट सिंह ने सवाल उठाए हैं.
नीले से केसरिया रंग में इस अचानक बदलाव के बाद सोशल मीडिया और खेल जगत में भी बहस शुरू हो गई है.
हालांकि हॉकी इंडिया ने इसे तकनीकी जरूरत बताते हुए बचाव किया है.
हॉकी इंडिया ने सोशल मीडिया पर नई जर्सी जारी करते हुए कहा कि इसके डिजाइन और रंग का मकसद ‘एक कहानी कहना’ और ‘भारत का गौरव’ दिखाना है.
हॉकी इंडिया ने नई जर्सी को पेश करते हुए एक वीडियो जारी किया है.
जर्सी का रंग और डिजाइन
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हॉकी इंडिया के वीडियो में केसरिया (भगवा) रंग को साहस, बलिदान और जीत का चिह्न बताया गया है. इस रंग को भारत के झंडे और उगते सूरज से प्रेरित बताया गया है और कहा गया है कि यह नई शुरुआत का संकेत है.
जर्सी के मध्य भाग में एक डिजाइन है जिसे मंडला कहा गया है जिसे भारत के समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित बताया गया है.
गले और बांह पर डीप नेवी ब्लू रंग की एक पतली पट्टी है, जो अशोक चक्र से प्रेरित है जो प्रगति, शांति और फ़ोकस का प्रतीक है.
जर्सी के ऊपरी हिस्से में चेस्ट ग्राफ़िक है जिसे सुदर्श चक्र की आधुनिक व्याख्या बताया गया है, इसे शक्ति, एकता और गति का प्रतीक कहा गया है.
जर्सी में गले से कंधे तक तिरंगे की एक पट्टी है जिसे ट्राईकलर पाइपिंग (भगवा, सफेद और हरा) कहा गया है. इसको राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक बताया गया है.
जर्सी के बीच अंग्रेज़ी में इंडिया लिखा गया है जो देवनागिरी लिपि से प्रभावित है और कहा गया है कि यह भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को दिखाता है.
पुरुष हॉकी टीम के पूर्व कप्तानों ने उठाए सवाल

पूर्व पुरुष हॉकी टीम के पूर्व कप्तानों परगट सिंह और वीरेन रस्किन्हा ने हॉकी इंडिया के फ़ैसले पर सवाल उठाए हैं. रस्किन्हा ने इसे ‘शर्मनाक’ बताया है.
पूर्व कप्तान और ओलंपियन वीरेन रस्किन्हा ने इस फैसले का विरोध करते हुए दशकों पुरानी खेल परंपरा को छोड़ने के पीछे की वजह पर सवाल उठाया.
उन्होंने एक्स पर लिखा, “मैं मानता हूं कि हॉकी इंडिया ने भारतीय हॉकी के लिए कई अच्छे काम किए हैं, लेकिन यह शर्मनाक है. भारतीय टीम की विरासत और पहचान हमेशा नीली रही है. मैंने कई वर्षों तक गर्व के साथ नीली जर्सी पहनी है. प्रशंसक भी भारतीय टीम को नीली जर्सी में देखना चाहते हैं. आखिर नारंगी रंग का तर्क क्या है?”
पुरुष हॉकी टीम के एक और पूर्व कप्तान परगट सिंह ने भी खेल पर विचारधारा थोपने के आरोप लगाए.
परगट सिंह पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हैं. जालंधर कैंट से कांग्रेस के विधायक हैं. परगट सिंह पंजाब के पूर्व शिक्षा और खेल मंत्री रहे हैं.
उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “दशकों से हॉकी इंडिया की टीम गर्व के साथ नीली जर्सी पहनती रही है, और यह रंग हमारी खेल पहचान का हिस्सा बन चुका है. इसे केसरिया रंग में बदलना भारतीय जनता पार्टी सरकार की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें हर जगह अपनी विचारधारा थोपने की कोशिश दिखाई देती है.”
परगट सिंह ने कहा, “खेलों का राजनीतिकरण करने के बजाय बेहतर बुनियादी ढांचा, विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और खिलाड़ियों को अधिक समर्थन देने पर ध्यान देना चाहिए. खेलों को राजनीति से दूर रखें. खेल का कोई धर्म या जाति नहीं होती, केवल खेल भावना होती है.”
हॉकी इंडिया ने क्या कहा
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उधर, हॉकी इंडिया ने जर्सी के नए रंग के पीछे तकनीकी आधार का हवाला दिया है.
हॉकी इंडिया ने कहा, “मुख्य विचार तकनीकी था. नीली खेल जर्सी अक्सर नीले सिंथेटिक मैदान में घुल-मिल जाती थी, जो अब अंतरराष्ट्रीय हॉकी पिचों का मानक रंग है. इससे खिलाड़ियों के लिए मैदान पर स्पष्टता और दृश्यता प्रभावित होती थी.”
हॉकी इंडिया का कहना है कि जर्सी को खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ़ से सलाह-मशविरा करने के बाद अंतिम रूप दिया गया है. हॉकी इंडिया के मुताबिक़, केसरिया रंग साहस, बलिदान और जीत का प्रतीक है.
हॉकी इंडिया ने एक बयान में कहा, “यह पाया गया था कि नीले रंग की जर्सी अंतरराष्ट्रीय हॉकी में अब मानक बन चुकी नीली सिंथेटिक पिच के साथ घुल-मिल जाती है.”
हॉकी इंडिया ने कहा, “इस वजह से खिलाड़ियों के लिए मैदान पर चीजों को साफ़ तौर पर देखना और पहचानना प्रभावित हो रहा था. इसी वजह से भारतीय टीम के लिए केसरिया जर्सी को अपनाने का फ़ैसला किया गया है.”
हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने एएनआई से बातचीत में कहा कि 2014 विश्व कप में पीली जर्सी और 2018 में आसमानी नीले डिजाइन का इस्तेमाल पहले भी किया जा चुका है, इसलिए जर्सी के रंग में बदलाव कोई नई बात नहीं है.
वहीं वीरेन रस्किन्हा ने एक्स पर एक अलग पोस्ट में स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे को राजनीतिक रंग नहीं देना चाहते.
उन्होंने लिखा, “मैं इस पर कई अनावश्यक राजनीतिक टिप्पणियां देख रहा हूं. मैं उसमें नहीं पड़ना चाहता. मेरा सीधा और विनम्र मुद्दा केवल गर्व, पहचान और विरासत का है.”
प्रियंका गांधी ने कहा- इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश
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कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने हॉकी इंडिया की ओर से जर्सी के रंग में बदले जाने को इतिहास फिर से लिखे जाने की कोशिश कहा है.
संसद परिसर में पत्रकारों से उन्होंने कहा, “चाहे वे यूनिफॉर्म बदलें या शिक्षा नीति के जरिए इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश करें, वे कुछ भी करें, इस देश के युवाओं ने अपनी राय साफ कर दी है. आपने देखा कि जंतर-मंतर पर जमा युवा क्या कह रहे थे? वही देश की आवाज है.”
“भारत की आजादी की लड़ाई अहिंसा और सच्चाई पर आधारित थी, और इसमें आरएसएस की कोई भूमिका नहीं थी. पूरा देश यह सच्चाई जानता है, और जो लोग नहीं जानते थे, वे भी अब उनके इरादों को समझने लगे हैं.”
पहले भी हुआ जर्सी के रंग पर विवाद
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हालांकि नई जर्सी में नीले और तिरंगे के रंगों के शेड्स बनाए रखे गए हैं लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थ पर चर्चा तेज़ हो गई है.
पिछले डेढ़ दशक में सत्तारूढ़ एनडीए सरकार के दौरान इस रंग के बढ़ते इस्तेमाल को “भगवाकरण” कहा जाता रहा है.
हॉकी इंडिया के प्रचार वीडियो में भी राष्ट्रवादी प्रतीकों का प्रमुखता से इस्तेमाल किया गया, जिसमें केसरिया पृष्ठभूमि के साथ देवनागरी लिपि, सुदर्शन चक्र के ग्राफिक्स और सरकार के प्रमुख नारे “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” को दिखाया गया.
पीटीआई ने एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा, “इसमें कुछ भी राजनीतिक नहीं है. अगर केसरिया पहली जर्सी है तो इसमें ग़लत क्या है? केसरिया हमारे तिरंगे का हिस्सा है. बदलाव का स्वागत होना चाहिए.”
भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम ने 2019 वनडे विश्व कप में इंग्लैंड में नारंगी रंग की “अवे” जर्सी पहनी थी, जिसे लेकर भी व्यापक विवाद हुआ था. इसके बाद के वर्षों में पूरी तरह नीली किट की जगह नारंगी और तिरंगे रंग की धारियों और डिजाइन का इस्तेमाल आम होता गया.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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