डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा कथित तौर पर दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए फैसलों, जारी दिशा-निर्देशों और साफ्टवेयर में किए गए बदलावों को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि इस तरह की कार्रवाई सामूहिक निर्णय लेने की वैधानिक अनिवार्यता का उल्लंघन करती है।
किसने दायर की याचिका?
यह याचिका अधिवक्ता चांद कुरैशी के माध्यम से अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर की गई है। याचिका में अनुरोध किया गया है कि ज्ञानेश कुमार द्वारा कथित तौर पर दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए फैसलों को असंवैधानिक और अमान्य घोषित किया जाए।
क्या है पूरा मामला?
इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य अधिकारियों के खिलाफ कर्तव्य के उल्लंघन से संबंधित प्रविधानों के तहत आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का भी अनुरोध किया है।
यह याचिका उस रिपोर्ट के कुछ दिन बाद दायर की गई है, जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने चुनाव आयोग के नाम पर लिए गए कई फैसलों पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)