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TMC में बड़ी टूट: सीएम शुभेंदु से मिले ममता के 20 से ज्यादा बागी सांसद, लोकसभा में कैसे बदलेगा पूरा गेम? Inside Story

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Jun 9, 2026


जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा की तरह लोकसभा में भी तृणमूल की बड़ी टूट सामने आई है। काकोली घोष दस्तीदार ने 20 लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों के साथ भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की है। लोकसभा में तृणमूल के फिलहाल 28 सांसद है। एक सांसद की मौत हो चुकी है।

इसके पहले विधानसभा में ऋतब्रत चटर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस 58 विधायकों अलग गुट के रूप में मान्यता मिल चुकी है। वहीं राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसद शुखेंदु शेखर राय ने राज्यसभा के साथ-साथ पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। वहीं राज्यसभा सांसद कोयल मलिक के भी इस्तीफा देने की चर्चा है।

तृणमूल कांग्रेस में बड़ी टूट

तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के इंडी गठबंधन की बैठक में हिस्सा लेने के दौरान ही पार्टी के एक दर्जन से अधिक सांसदों ने केंद्रीय मंत्री व पश्चिम बंगाल से चुनाव प्रभारी रहे भूपेंद्र यादव से उनके घर पर मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे। माना जा रहा है कि इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस के टूटने की प्रक्रिया की शुरूआत हो गई है।

20 सांसदों के साथ दलबदल विरोधी कानून से बच जाएंगे

लोकसभा अध्यक्ष की अनुमति के बाद उन्हें संसद में तृणमूल से अलग घटक घोषित किया जा सकता है और बैठने की व्यवस्था भी अलग हो सकती है। वैसे लोकसभा में 20 सांसदों के साथ दो-तिहाई बहुमत के बाद इन सांसदों पर दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई से बच जाएंगे। लेकिन इसके लिए उन्हें भाजपा में अपने गुट का विलय करना होगा।

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भाजपा में करना होगा विलय

संविधान की अनुसूची 10 में पार्टी के किसी धड़े के अलग होने का कोई प्रविधान नहीं है। 2003 में किये गए संशोधन में इसे हटा दिया गया था। इसके तहत केवल दो तिहाई से अधिक सदस्य किसी अन्य दल में अपना विलय कर सकते हैं।

जैसा कि राघव चड्ढा के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने किया। लेकिन तृणमूल कांग्रेस के अलग होने वाले सांसद भाजपा में विलय के बजाय अलग गुट के रूप में मान्यता देने की बात कर रहे हैं।

खुद को मूल तृणमूल कांग्रेस साबित करना चाहता है गुट

विधानसभा में भी तृणमूल कांग्रेस ने यही दावा किया है। स्पष्ट है कि दोनों सदनों और संगठन में भी अपना बहुमत साबित कर यह गुट मूल तृणमूल कांग्रेस के रूप में खुद को स्थापित करेगा।

ध्यान रहे कि कोर्ट से भी ऐसे गुट को ही मूल पार्टी की मान्यता मिलती है। महाराष्ट्र मे शिवसेना और राकांपा के मामले में ऐसा ही हुआ जब एकनाथ शिंदे के साथ टूटे घटक को मूल शिवसेना का दर्जा मिला और अजित पवार के साथ गए घटक को मूल राकांपा का।

काकोली घोष दस्तीदार अभी भी टीएमसी की चीफ व्हीप

ऐसा ही संभवत: तृणमूल के नेता करने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी पर कब्जे की दिशा में कदम बढ़ाते हुए अलग हुए गुट ने काकोली घोष दस्तीदार को चीफ व्हीप से हटाने के फैसले को भी चुनौती दे दी है।

बताया जा रहा है कि पार्टी महासचिव और लोकसभा में संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी ने काकोली घोष के चीफ व्हीप से हटाने का एलान जरूर किया था, लेकिन इसका पत्र लोकसभा सचिवालय को नहीं भेजा था। यानी तकनीकी रूप से काकोली घोष दस्तीदार अब भी लोकसभा में चीफ व्हीप हैं।

58 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी चुना अपना नेता

इसके साथ ही जैसे विधानसभा में 58 विधायकों ने पार्टी की ओर नियुक्त शोभन चट्टोपाध्याय को नेता मानने के बजाय उनकी जगह ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना था। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इसी तरह से नया गुट अभिषेक बनर्जी की जगह संसदीय दल का नया नेता बनाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध कर सकता है।

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