भारत और अमेरिका के बीच होने वाले द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट कर दिया है कि इस समझौते की घोषणा तभी की जाएगी, जब अमेरिका हमारे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले भारत को तरजीही दरें (Preferential Rates) प्रदान करेगा। नई दिल्ली में आयोजित ‘मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का लाभ उठाने’ पर राष्ट्रीय कार्यशाला में बोलते हुए गोयल ने वैश्विक स्तर पर व्यापार के लिए भारत के विजन को साझा किया।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर अंतिम मुहर कब लगेगी?
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, जैसे ही अमेरिका हमारे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में भारत को तरजीही दरों की पेशकश करेगा, इस समझौते को अंतिम रूप देकर इसके विवरणों की घोषणा कर दी जाएगी। भारत और अमेरिका ने इस साल फरवरी में ही सौदे के पहले चरण की रूपरेखा तय कर ली थी, लेकिन बाद में अमेरिकी टैरिफ परिदृश्य में आए बदलावों के कारण दोनों पक्षों को दोबारा बातचीत की मेज पर लौटना पड़ा। अमेरिका ने इस साल 24 जुलाई से भारत सहित कई देशों पर 10% का अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है। अब इस मुद्दे को सुलझाने के लिए गोयल सितंबर के अंत में अमेरिका के मिल्वौकी शहर जाएंगे, जहां वे 30 सितंबर से शुरू होने वाली 2-दिवसीय जी-20 व्यापार मंत्री स्तरीय बैठक में हिस्सा लेंगे और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जेमिसन ग्रीर के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे।
इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को क्या फायदा होगा?
अमेरिका भारतीय उत्पादों के लिए एक बहुत बड़ा बाजार है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत ने अमेरिका को 87 बिलियन डॉलर ( करीब 8,21,715 करोड़ रुपये) मूल्य की वस्तुओं का निर्यात किया था। अमेरिकी बाजार में भारत का सीधा मुकाबला वियतनाम, बांग्लादेश, थाईलैंड, कंबोडिया, इंडोनेशिया, मलेशिया और श्रीलंका जैसे देशों से है। यदि अमेरिका भारत को तरजीही दरें देता है, तो भारतीय सामानों को वहां के बाजार में भारी मूल्य प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल होगी, जिससे निर्यात में भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।
वैश्विक बाजार में भारत की अन्य व्यापार संधियों का गणित क्या है?
पीयूष गोयल ने बताया कि भारत के पास इस समय 9 सक्रिय मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) हैं, जो लगभग 60 ट्रिलियन डॉलर की सामूहिक जीडीपी वाली अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये समझौते भारत को वैश्विक व्यापार के करीब दो-तिहाई हिस्से तक तरजीही पहुंच प्रदान करते हैं। इसके अलावा, भारत अगले कुछ महीनों और वर्षों में कनाडा, मैक्सिको, चिली, मर्कोसुर, दक्षिण अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (एसएसीयू), खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) और इस्राइल जैसे देशों व संगठनों के साथ नए व्यापार समझौते संपन्न करने जा रहा है। साथ ही आसियान, जापान और कोरिया के साथ मौजूदा समझौतों की समीक्षा की जा रही है, जिससे भारत की पहुंच वैश्विक व्यापार के 75% हिस्से तक प्रतिस्पर्धियों से कम दरों पर हो जाएगी।
देश के निर्यात प्रदर्शन और भविष्य के लक्ष्य क्या हैं?
सरकार ने वर्तमान वर्ष के लिए 1 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 94.45 लाख करोड़ रुपये) के निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस दिशा में शुरुआत काफी सकारात्मक रही है और चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में ही हमारा निर्यात 317 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल की समान अवधि के 280 अरब डॉलर से उल्लेखनीय रूप से अधिक है। सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य साल 2030 तक निर्यात को 2 ट्रिलियन डॉलर (188.90 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंचाना है। इसके लिए निर्यातकों को आगामी 100 ‘भव्य’ (BHAVYA) औद्योगिक पार्कों में प्राथमिकता के आधार पर सहायता और प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं दी जाएंगी।
निर्यातकों के सामने क्या चुनौतियां और अवसर हैं?
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने चेताया कि व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसरों की यह खिड़की हमेशा के लिए खुली नहीं रहेगी, क्योंकि देर-सबेर प्रतिस्पर्धी देश भी ऐसे समझौते कर लेंगे। इसलिए भारत को अगले 5 से 10 वर्षों में मजबूत और नई आपूर्ति शृंखलाएं विकसित करनी होंगी। इसके अलावा, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन जैसे विकसित बाजारों में गुणवत्ता के मानक बहुत ऊंचे हैं, जिस पर खरे उतरे बिना निर्यात बढ़ाना संभव नहीं होगा।