भारतीय क्रिकेट के लिए दो नवंबर यानी आज का दिन बेहद खास है। आज से एक साल पहले 2025 को भारतीय महिला टीम ने पहली बार वनडे विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था। हरमनप्रीत कौर की अगुआई वाली टीम ने घरेलू जमीन पर विश्व विजेता बनने का गौरव हासिल किया था। भारतीय टीम ने फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराया था और आईसीसी की पहली ट्रॉफी अपने नाम की थी। भारत के लिए ये ऐतिहासिक जीत थी क्योंकि इससे पहले देश ने महिला क्रिकेट में विश्व कप नहीं जीता था। हरमनप्रीत कौर की अगुआई वाली टीम ने वो उपलब्धि हासिल कर ली थी, जो अब तक महिला क्रिकेट में भारत के लिए कोई नहीं कर सका था। आइए जानते हैं कि नवी मुंबई में खेले गए उस खिताबी मैच में किस तरह भारत ने जीत दर्ज की थी…
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भारत ने महिला वनडे विश्व कप का खिताब जीता
– फोटो : BCCI
कौन था मेजबान?
महिला वनडे विश्व कप यह 13वां संस्करण भारत और श्रीलंका की मेजबानी में खेला गया था। मैच गुवाहाटी, इंदौर, नवी मुंबई, विशाखापट्टनम और कोलंबो में आयोजित हुए थे।
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महिला टीम ने जीता वनडे विश्व कप 2025
– फोटो : ANI
52 साल का सूखा किया था खत्म
पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 50 ओवर में सात विकेट पर 298 रन बनाए थे। जवाब में दक्षिण अफ्रीका की टीम 246 रन पर सिमट गई। टीम इंडिया ने महिला वनडे विश्व कप 2025 के फाइनल में इस तरह दक्षिण अफ्रीका को 52 रन से हराया था। 52 साल के महिला वनडे विश्व कप के इतिहास में यह भारत का पहला वनडे विश्व कप का खिताब था। पहला महिला वनडे विश्व कप 1973 में खेला गया था। भारत की ओर से दीप्ति शर्मा और शेफाली वर्मा ने अर्धशतकीय पारी खेली।
भारत की ओर से दीप्ति शर्मा ने 58 रन और शेफाली ने 87 रन की पारी खेली। इसके अलावा स्मृति मंधाना ने 45 रन बनाए। वहीं, ऋचा घोष ने 24 गेंद में 34 रन की तूफानी पारी खेली। जेमिमा रॉड्रिग्स 24 रन और कप्तान हरमनप्रीत कौर 20 रन बनाकर आउट हुईं। वहीं, अमनजोत कौर ने 12 रन बनाए। दक्षिण अफ्रीका की ओर से अयाबोंगा खाका ने तीन विकेट लिए। वहीं, मलाबा, डी क्लर्क और क्लो ट्रायोन को एक-एक विकेट मिला था।
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हरमनप्रीत कौर और जय शाह
– फोटो : PTI
किस तरह लक्ष्य से चूका दक्षिण अफ्रीका
299 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी दक्षिण अफ्रीका की टीम ने नियमित अंतराल पर विकेट गंवाए। कप्तान एल वोल्वार्ट के अलावा कोई अफ्रीकी बल्लेबाज मैदान पर नहीं टिक सका। वोल्वार्ट ने 98 गेंद में 11 चौके और एक छक्के की मदद से 101 रन की पारी खेली। वहीं, ताजमिन ब्रिट्स 23 रन और सुने लूस 25 रन बना सकीं। बॉश खाता नहीं खोल सकीं। मारिजाने कैप चार रन और क्लो ट्रायोन नौ रन बनाकर आउट हुईं।
सिनालो जाफ्ता ने 16 रन की पारी खेली। आखिर में डर्कसेन ने जरूर 35 रन बनाए, जबकि डी क्लर्क ने 18 रन बनाए, लेकिन यह काफी नहीं था। शेफाली वर्मा ने बल्लेबाजी के बाद गेंदबाजी में भी कमाल दिखाया। उन्होंने दो विकेट झटके और प्लेयर ऑफ द मैच रहीं। इसके अलावा श्री चरणी ने एक विकेट लिया और कसी हुई गेंदबाजी की। दक्षिण अफ्रीका की पारी 45.3 ओवर में 246 रन पर सिमट गई और भारतीय महिला टीम को विश्व विजेता बनने का गौरव हासिल हुआ। इस टीम ने मेहनत, जज्बे और विश्वास से वो मुकाम छू लिया था, जिसका सपना करोड़ों भारतीयों ने देखा था। मंधाना की चमक से लेकर रेणुका की रफ्तार तक, हर खिलाड़ी की अपनी एक कहानी रही, जो संघर्ष, हिम्मत और उम्मीदों से बुनी गई।