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‘आतंकी आसमान में हों या पाताल में… छोड़ना नहीं’; पहलगाम हमले के बाद PM मोदी ने दिए थे कड़े निर्देश; डोभाल का खुलासा

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Aug 16, 2026


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने ऑपरेशन सिंदूर के पीछे की रणनीतिक सोच के बारे में पहली बार विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किए गए 88 घंटे के सैन्य अभियान के लिए भारत ने कैसे अपने लक्ष्य तय किए और इसके लिए जिम्मेदार आतंकवादी ढांचे को नष्ट करने की योजना बनाई।

पहलगाम नरसंहार के बाद के तनावपूर्ण माहौल को याद करते हुए डोभाल ने प्रधानमंत्री मोदी की उस तत्काल प्रतिक्रिया का विवरण दिया जब उन्होंने अपनी विदेश यात्रा बीच में ही छोड़ दी थी।

‘हम आतंकियों को माफ नहीं करेंगे’

डोभाल ने पीएम मोदी के शब्दों को दोहराते हुए कहा, “एयरपोर्ट पर ही हमारी बैठक हुई। सबसे पहले वह सभी तथ्य जानना चाहते थे और फिर उनका मुझसे पहला सवाल था कि यह किसने किया है। हम उनके पीछे जाएंगे। चाहे वे जमीन पर हों, आसमान में हों या पाताल में… वे जहां भी हों, हम उन्हें माफ नहीं करेंगे।”

अजीत डोभाल ने कहा, “हमारी खुफिया एजेंसियों का धन्यवाद… उन्होंने शानदार काम किया और बहुत कम समय में हम दोषियों की पहचान करने और सटीक कार्रवाई करने में सफल रहे।” पहलगाम हमले के जवाब की योजना बनाने वालों में से एक माने जाने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने संकेत दिया कि भारत किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार था।

‘हम खून की आखिरी बूंद तक लड़ते’

डोभाल ने कहा, “एक बार जब यह शुरू हो जाता है तो हम किसी देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए जितनी दूर तक जाना पड़े, जाने को तैयार रहते हैं… और इसकी कोई सीमा नहीं होती। हम खून की आखिरी बूंद तक लड़ते हैं। भारत के अधिक सहनशील होने को उसकी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।”

उन्होंने पुष्टि की कि जिन आतंकवादियों ने आस्था के आधार पर लोगों को निशाना बनाया था, उन्होंने देश की सहनशीलता की सीमा को पार कर दिया था। दोषियों ने भारतीय नेतृत्व को चुनौती देते हुए दुस्साहसपूर्ण ढंग से ललकारा था।

‘हम बर्दाश्त नहीं कर सकते’

एनएसए ने याद करते हुए बताया, “उन्होंने (पहलगाम के आतंकवादियों ने) पीड़ितों से कहा था कि जाकर मोदी से कह दो कि वह जो कर सकते हैं, कर लें।” डोभाल ने कहा कि भारत ने शुरुआत में ही तय कर लिया था कि यह अभियान पहलगाम हमले से जुड़े दुश्मन के कैंपों को नष्ट करने पर केंद्रित होगा। यह हमला 22 अप्रैल, 2025 को हुआ था और इसमें 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी।

उन्होंने कहा, “हम चाहते थे कि पाकिस्तान की सेना यह समझे कि आतंकवाद को यह समर्थन या आतंकवादियों के खिलाफ असरदार कार्रवाई न कर पाना ऐसी बात है जिसे हम बर्दाश्त नहीं कर सकते… असल में, दुनिया का नजरिया बिल्कुल साफ है: भारत की उदारता या ज्यादा सहनशीलता को उसकी कमजोरी नहीं समझना चाहिए।”

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