पीटीआई, नई दिल्ली। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने गुरुवार को कहा कि संविधान सभी नागरिकों का है, यह केवल कुछ चुनिंदा लोगों का ही विशेषाधिकार नहीं है जोकि महंगे वकीलों और कानूनी प्रक्रियाओं का खर्च उठा सकते हैं।
सीजेआई ने ये विचार वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह की आत्मकथा ‘ द कांस्टिट्यूशन इज माई होम: कंवर्सेशंस ऑन ए लाइफ इन लॉ’ के विमोचन समारोह के दौरान अपने भाषण में व्यक्त किए।
हालांकि वह कार्यक्रम के मुख्यअतिथि थे लेकिन ब्रिक्स देशों के न्यायाधीशों की बैठक के कारण वह इसमें उपस्थित नहीं हो सके और उन्होंने एक वीडियो क्लिप भेजकर पुस्तक विमोचन के लिए अपनी गर्म शुभकामनाएं दीं।
इसमें अपने संबोधन में उन्होंने कहा- ”संविधान वास्तव में हमारा साझा घर है। यह केवल न्यायाधीशों, वकीलों या राज्य के अधिकारियों की संपत्ति नहीं है। यह ग्रामीण, शहरी, गरीबों और हाशिए पर रहने वाले हर नागरिक का समान रूप से है जोकि और इसके वादों में विश्वास रखते हैं।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि असली चुनौती कानूनों की कमी नहीं, बल्कि नागरिकों के अधिकारों और उनकी वास्तविक जिंदगी के बीच की दूरी को कम करना है।