इमेज कैप्शन, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका होर्मुज़ स्ट्रेट की नाकाबंदी करेगा….में
ईरानी अख़बारों और सोशल मीडिया विश्लेषकों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की होर्मुज़ नाकाबंदी की धमकी का मज़ाक उड़ाया है. लोगों के मुताबिक़ अमेरिका फिर से “उसी तरह नाकाम होगा, जैसे युद्ध के मैदान में हुआ था.”
28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमलों की शुरुआत की थी. जिसका ईरान ने भी जवाब दिया.
इसके बाद 8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच अस्थाई युद्धविराम हुआ. अमेरिका और ईरान पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बातचीत के लिए राज़ी हुए. वही बातचीत जिसमें दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पाई.
ईरान ने इस संघर्ष में ख़ुद को विजेता के तौर पर पेश किया है.
12 अप्रैल को ट्रुथ सोशल पर डोनाल्ड ट्रंप ने एलान कर दिया कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज़ स्ट्रेट में आने-जाने की कोशिश करने वाले हर जहाज़ की नाकाबंदी शुरू करेगी. उन्होंने यह भी जोड़ा कि इसमें दूसरे देश भी शामिल होंगे.
बाद में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसकी सेनाएं 13 अप्रैल को ईस्टर्न टाइम के मुताबिक़ सुबह 10 बजे (भारतीय समयानुसार 13 अप्रैल शाम 7.30 बजे) से इस नाकाबंदी को लागू करना शुरू करेंगी.
इसका निशाना ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी जहाज़ होंगे, लेकिन स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) के रास्ते ग़ैर-ईरानी बंदरगाहों तक जाने वाले जहाज़ों की आवाजाही नहीं रोकी जाएगी.
13 अप्रैल (सोमवार) को कई ईरानी अख़बारों ने ट्रंप की इस धमकी को ख़ारिज कर दिया और मज़ाक में कहा कि वह सिर्फ़ उस जलमार्ग को ‘और ज़्यादा बंद’ कर रहे हैं, जिसे ईरान युद्ध के बाद से पहले ही काफ़ी कुछ बंद कर चुका है.
‘पूरी दुनिया के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ रहे हैं ट्रंप’
इमेज कैप्शन, ईरानी मीडिया ने ट्रंप की नाकेबंदी की धमकी का मज़ाक उड़ाया है
कट्टरपंथी अख़बार फ़रहिख़ेगान ने हेडलाइन लगाई: “ट्रंप होर्मुज़ स्ट्रेट बंद करने वाले गठबंधन में शामिल”
एक और कट्टरपंथी अख़बार जवान ने लिखा कि ट्रंप जैसे लोग यह नहीं समझते कि उनका अल्टीमेटम होर्मुज़ स्ट्रेट पर ‘एक और ताला’ लगाने जैसा होगा. जबकि इससे पहले वो होर्मुज़ स्ट्रेट खोलने की बात करते रहे हैं.
अख़बार ने दावा किया कि अमेरिका के यूरोपीय और एशियाई सहयोगी पहले ही ईरान को टोल देकर इस जलमार्ग से गुज़रने के लिए बातचीत कर रहे हैं. उसके मुताबिक ट्रंप का यह क़दम असल में ‘पूरी दुनिया से युद्ध’ जैसा है.
जवान ने चेतावनी दी कि ईरान के पास इस क़दम से निपटने के लिए पूरे विकल्प मौजूद हैं.
उसने लिखा, “अगर ट्रंप समुद्री रास्ते से ईरानी तेल निर्यात रोकते हैं, तो ईरान क्षेत्र के तेल को धुएं में उड़ा देगा, जिससे वैश्विक क़ीमतें तेज़ी से बढ़ेंगी.”
अख़बार ने यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के ज़रिए बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट को बंद करने की भी बात कही, जिससे स्वेज़ नहर तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाएगा.
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इमेज कैप्शन, तेहरान में अमेरिका के ख़िलाफ़ आयोजित प्रदर्शन में हिस्सा लेती एक महिला (तस्वीर: 13 अप्रैल 2026)
सरकारी अख़बार जाम-ए-जम ने कहा कि ईरान के ख़िलाफ़ ट्रंप की नौसैनिक नाकाबंदी नीति का दुनिया भर में असर होगा और यहां तक कि अमेरिका में भी ऊर्जा की लागत बढ़ जाएगी. उसने इस धमकी को ‘नौसैनिक ब्लफ़’ बताया.
विदेश मामलों के विश्लेषक मुस्तफ़ा नजफ़ी ने सुधारवादी वेबसाइट इन्साफ न्यूज़ में लिखा कि स्ट्रेट को युद्ध से और फिर इस्लामाबाद वार्ता से खोलने में नाकाम रहने के बाद यह ट्रंप का ईरान के ख़िलाफ़ ‘तीसरा सैन्य क़दम’ है.
नजफ़ी ने चेताया कि यह रणनीति होर्मुज़ को एक ‘स्थायी तनाव बिंदु’ में बदल सकती है. ऊर्जा आपूर्ति में किसी भी गंभीर अड़चन से दुनिया भर में तेल क़ीमतें बढ़ेंगी और ये बड़े युद्ध में तब्दील हो सकता है.
उनके मुताबिक ट्रंप की नाकाबंदी रणनीति के चार मुख्य लक्ष्य हैं:
ईरान के ऊर्जा निर्यात को रोकना या कम करना
होर्मुज़ स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) में ईरान के नए टोल सिस्टम को रोकना
चीन जैसे बड़े उपभोक्ताओं पर दबाव बनाना
इस जलमार्ग पर अमेरिका की सक्रिय सुरक्षा भूमिका के लिए कानूनी आधार बनाना
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस रणनीति में एक अंदरूनी विरोधाभास है- अमेरिका दबाव बढ़ाकर होर्मुज़ स्ट्रेट पर नियंत्रण चाहता है, लेकिन वही दबाव ऐसे हालात भी पैदा कर सकता है जहां नियंत्रण सभी पक्षों के हाथ से निकल जाए.
विदेश मामलों के विश्लेषक अली बिगदेली ने आईएलएनए न्यूज़ एजेंसी से कहा कि यह नाकाबंदी का दावा दिखाता है कि अमेरिका ‘फ़िलहाल ईरान के साथ सीधे युद्ध में नहीं जाना चाहता.’
सोशल मीडिया पर भी बहस
शॉर्ट वीडियो देखिए
वीडियो कैप्शन, ईरान और अमेरिका के बीच नहीं हो पाया समझौता
ईरान के अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं वाले विश्लेषकों और नेताओं ने भी इस नाकाबंदी पर प्रतिक्रिया दी.
कट्टरपंथी पत्रकार अली क़ोलहाकी ने कहा कि अमेरिका दो महीने से ज़्यादा इस नाकाबंदी को जारी नहीं रख सकता, क्योंकि इससे दुनिया भर में तेल की क़ीमतों में भारी उछाल आएगा. उन्होंने कहा कि ईरान अब बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट को दबाव के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है.
सुधारवादी टिप्पणीकार बेहुरूज़ अज़ीज़ी ने अमेरिकी नौसेना की होर्मुज़ स्ट्रेट को पार करने में ‘नाकामी’ पर ज़ोर देते हुए कहा कि ईरानी नौसैनिक बल पूरी तरह तैयार हैं और “ट्रंप का बड़ा दांव उन्हें उनके अंत की ओर ले जाएगा.”
सुधारवादी पूर्व सांसद महमूद सादेगी ने कहा कि ट्रंप पिछली ग़लतियों की भरपाई करना चाहते हैं, लेकिन वह इससे भी बड़ी भूल कर रहे हैं.
पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद ज़रीफ़ ने एक्स पर लिखा कि ट्रंप के लिए होर्मुज़ अब ‘डूबते को तिनके का सहारा’ जैसी है और “सबसे ख़राब जुआरी ट्रंप यह नहीं जानते कि हारती हुई बाज़ी कब छोड़नी है.”
सुधारवादी विश्लेषक अहमद ज़ैदाबादी ने ट्रंप को “घमंडी मूर्ख” कहा, जो दलदल से निकलने का सही रास्ता खोजने के बजाय ‘ट्वीट-थेरेपी’ का सहारा ले रहे हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि रूस और चीन चाहते हैं कि ट्रंप खाड़ी में यूं ही उलझे रहें, इसलिए वे मध्यस्थता में ज़्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं.
रूढ़िवादी टिप्पणीकार हुसैन ग़तीब ने एक्स पर लिखा कि इस नाकाबंदी का एक दीर्घकालिक असर वाख़ान कॉरिडोर के वाख़जीर दर्रे को गंभीरता से खोलने के रूप में सामने आ सकता है, जो चीन और अफ़ग़ानिस्तान के बीच एकमात्र सीधा ज़मीनी संपर्क है.
सत्ता-विरोधी आवाज़ें: आर्थिक तबाही की चेतावनी
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इमेज कैप्शन, ईरान युद्ध के दौरान कुछ जगहों पर मौजूदा ईरानी सरकार के विरोध में भी प्रदर्शन हुए, ये तस्वीर लंदन में ईरानी दूतावास के सामने हुए प्रदर्शन की है (तस्वीर: 29 मार्च 2026)
वहीं कुछ सत्ता-विरोधी आवाज़ों ने चेतावनी दी कि यह नाकाबंदी ईरान में आर्थिक पतन और खाद्य संकट ला सकती है.
एक ईरानी विश्वविद्यालय के एक प्रोफ़ेसर ने कहा कि इससे ईरानी अर्थव्यवस्था ढह सकती है.
विदेश में रहने वाले पत्रकार एहसान सोल्तानी ने कहा कि इससे 90% खाद्य और अन्य सामानों के आयात पर असर पड़ेगा और देश तीन महीनों में ‘सोमालिया जैसी स्थिति’ में पहुंच सकता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित