पीटीआई, नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी ने गुरुवार को दिल्ली सरकार की उस अधिसूचना का स्वागत किया, जिसमें कहा गया है कि उसके आंदोलन के दौरान दर्ज एफआईआर पर आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
हालांकि, पार्टी ने स्पष्ट किया कि मामलों को केवल बंद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सभी एफआईआर औपचारिक रूप से वापस ली जानी चाहिए।
पार्टी ने चेतावनी दी कि 25 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए समझौते के तहत दिए गए आश्वासनों में किसी भी तरह की कोताही छात्रों को फिर से सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर सकती है।
सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि अधिसूचना की भाषा वैसी नहीं है, जैसा कि सरकार ने आश्वासन दिया था।
दिल्ली सरकार ने एक अधिसूचना जारी की है, जिसमें कहा गया है कि सभी एफआईआर पर आगे कोई कार्रवाई नहीं होगी और उन्हें बंद माना जा सकता है। हम इस शब्द के इस्तेमाल से खुश नहीं हैं। उन्हें यह कहना चाहिए था कि एफआईआर वापस ली जाएगी।
उन्होंने कहा-सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर पर कार्रवाई जारी रखने का आदेश दिया है। लेकिन, यह स्थिति को गलत तरीके से समझने और गुमराह करने जैसा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि एफआईआर वापस नहीं ली जा सकती। यह अधिकार सरकार के पास है। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि 25 जुलाई को प्रदर्शनकारियों को दिए गए आश्वासनों का पालन किया जाए।
विधेयक में नीट पेपर लीक रोकने पर बात नहीं : रांका
पेपर लीक रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाए गए विधेयक के प्रविधानों पर कॉकरोच जनता पार्टी ने सवाल उठाया है। कहा है कि यह विधेयक नीट पेपर लीक के बाद की बात करता है, चाहे फास्ट ट्रैक कोर्ट, जुर्माना या सजा हो।
विधेयक में नीट पेपर लीक रोकने के लिए क्या कर रहे हैं, इस बारे में कोई बात नहीं की गई है। पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि इस विधेयक में परीक्षा की आधारभूत सुविधाओं के मामले पर बात नहीं की गई है।
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कोचिंग सेंटर, परीक्षा की समय सारणी, पेपर, पाठ्यक्रम तक पर कोई बात नहीं है। इसी तरह, एनटीए समेत परीक्षा कराने वाली एजेंसियों पर भी बात नहीं है। जब तक ऐसे सारे मुद्दे नहीं सुलझाए जाएंगे, तब तक नीट पेपर लीक रुकने वाले नहीं हैं।