आईएएनएस, नई दिल्ली। देश में एल नीनो के संभावित प्रभाव और खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर मंगलवार को प्रधानमंत्री कार्यालय में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई।
इस दौरान प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डा. पीके मिश्रा ने सभी संबंधित मंत्रालयों को राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि एल नीनो की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और मानसून या मानसून में देरी का असर संवेदनशील जिलों में नियमित रूप से आंका जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत राहत और सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अनुसार, बैठक में कृषि, ऊर्जा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, आर्थिक मामलों, उपभोक्ता मामलों सहित 15 से अधिक मंत्रालयों के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) ने जून और सात जुलाई तक की वर्षा की स्थिति तथा देश में मानसून की प्रगति की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मानसून करीब 10 दिन की देरी से पहुंचा था।
हालांकि, सात जुलाई तक हुई बारिश के बाद देशभर में वर्षा की कमी घटकर 12 प्रतिशत रह गई है। जुलाई के पहले सप्ताह में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है।
आईएमडी के अनुसार, जुलाई और अगस्त में कमजोर से मध्यम स्तर का एल नीनो रहने की संभावना है, लेकिन अलनीनो के कारण सामान्य से कम वर्षा होना जरूरी नहीं है।
डा. पीके मिश्रा ने संवेदनशील जिलों में पेयजल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने, जलाशयों के जलस्तर की नियमित निगरानी और उपलब्ध पानी के उपयोग पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने पशुओं के लिए सूखे और हरे चारे की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा चारा विकास योजनाओं की नियमित समीक्षा के भी निर्देश दिए। बैठक में कृषि मंत्रालय ने खरीफ फसलों की तैयारियों का ब्यौरा प्रस्तुत किया।
अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड के अधिकतम कवरेज के लिए अभियान शुरू किया गया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने लू, अधिक आर्द्रता और डेंगू की निगरानी के लिए जारी एडवाइजरी की जानकारी दी, जबकि उपभोक्ता मामलों के विभाग ने चावल, गेहूं और दालों के बफर स्टाक को पर्याप्त बताया। उर्वरक विभाग ने भी रबी सीजन के लिए पर्याप्त खाद उपलब्ध होने की जानकारी दी।