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ऑपरेशन चक्र-vi:सीबीआई ने गुजरात में ₹11.42 करोड़ के ‘डिजिटल अरेस्ट’ केस में दो को पकड़ा, 10 राज्यों में छापा – Operation Chakra-vi: Two More Held By Cbi For Rs 11.42 Cr ‘digital Arrest’ Case In Gujarat

Byadmin

Sep 27, 2026


‘ऑपरेशन चक्र-VI’ के तहत ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुड़े अपराधों के खिलाफ देशव्यापी कार्रवाई को तेज करते हुए, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने 10 राज्यों में 22 जगहों पर एक साथ छापेमारी की है। गुजरात के एक बड़े ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामले में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई उन सिंडिकेट्स (गिरोहों) के खिलाफ सीबीआई की लगातार चल रही मुहिम का हिस्सा है, जो इस खतरे के पीछे हैं। यह सिंडिकेट, देश भर के नागरिकों के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। इन अपराधों के चिंताजनक स्तर को गंभीरता से लेते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह दोषियों और ऐसे अपराधों में मदद करने वाले बड़े नेटवर्क के खिलाफ ठोस कार्रवाई करे।

इस मामले में, साइबर अपराधियों ने पुलिस अधिकारियों और टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों का रूप धरकर पीड़ित को कथित तौर पर तीन महीने तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा। उन्हें सिंडिकेट द्वारा नियंत्रित खातों में 11.42 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। मनी ट्रेल (पैसे के लेन-देन के रास्ते) के डिटेल्ड फाइनेंशियल और टेक्निकल एनालिसिस के आधार पर की गई तलाशी के दौरान कई अहम चीजें जब्त की गईं। इनमें बैंक से जुड़े दस्तावेज, अकाउंट से जुड़े रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस और दूसरे जरूरी सबूत शामिल हैं। अब इन सबूतों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि ‘डिजिटल अरेस्ट’ सिंडिकेट के उस बड़े फाइनेंशियल और टेक्निकल इंफ्रास्ट्रक्चर का पता लगाया जा सके जो अलग-अलग राज्यों में फैला हुआ है।

तलाशी के दौरान हुई जांच से पता चला कि गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों – हिमांशु प्रसाद और यूनिस बिस्वास – की अपराध से मिली रकम को लेने, उसे कई खातों में घुमाने (लेयरिंग) और आगे भेजने में खास और अहम भूमिका थी। जांच में सामने आया है कि उन्होंने कथित तौर पर हेक्साक्यूएस्ट ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड के बैंक अकाउंट का इस्तेमाल करके पीड़ित से ठगी गई 11.42 करोड़ रुपये की रकम में से 2.5 करोड़ रुपये हासिल किए। साथ ही, मनी ट्रेल को छिपाने के मकसद से उन्होंने इस रकम को अपने साथियों के कई खातों में ट्रांसफर करने में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

जांच में यह भी पता चला है कि दोनों आरोपी कथित तौर पर बैंक अकाउंट का इस्तेमाल करने और केपीके फ़ाइलें इंस्टॉल करके ‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी और दूसरे साइबर अपराधों से मिली रकम को हड़पने में शामिल थे। उनके पास से जब्त किए गए डिजिटल डिवाइस से कई आपत्तिजनक चैट, मैसेज और दस्तावेज भी मिले हैं। नेटवर्क के बाकी सदस्यों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने की कोशिशें जारी हैं।

ऑर्गनाइज्ड साइबर क्राइम के खिलाफ अपनी लगातार लड़ाई को आगे बढ़ाते हुए, सीबीआई ने अलग-अलग राज्यों से ‘डिजिटल अरेस्ट’ के कई मामले अपने हाथ में लिए हैं। इन मामलों में साइबर अपराधियों ने कानून लागू करने वाली एजेंसियों और सरकारी अधिकारियों का रूप धरकर पीड़ितों को डिजिटल रूप से बंधक बनाया और उनसे बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। पिछले 30 दिनों में, सीबीआई ने इनमें से चार मामलों में 22 राज्यों की 142 जगहों पर बड़े पैमाने पर और तालमेल बिठाकर छापेमारी की है। 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई का मकसद अपराध से हुई कमाई का पता लगाना, सिंडिकेट के पीछे के फायदा उठाने वालों और उन्हें चलाने वालों की पहचान करना और सबूत नष्ट होने से पहले उन्हें जब्त करना था।

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