डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। ऑपरेशन सिंदूर हो या ऑपरेशन सफेद सागर, भारतीय वायु सेना की पराक्रम की कहानी में एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का नाम जरूर लिया जाता है।
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा पूर्व फाइटर पायलट हैं। इन्होंने भारतीय वायु सेना (IAF) में 39 साल से ज्यादा समय तक सेवाएं दी हैं और अब राम मंदिर चंदा चोरी मामले के बाद ट्रस्ट का पहला CEO बनाया गया है।
कौन हैं एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा?
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा 6 दिसंबर, 1986 को भारतीय वायु सेना में फाइटर पायलट के तौर पर शामिल हुए थे। वह एक फाइटर कॉम्बैट लीडर रहे हैं और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी।
जितेंद्र मिश्रा ने पुणे में नेशनल डिफेंस एकेडमी, बेंगलुरु में एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल, अमेरिका में एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और यूके में रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से पढ़ाई की है।
जितेंद्र मिश्रा IAF में ऐसे फाइटर पायलट रहे हैं, जिनके पास 3,000 घंटे से ज्यादा की उड़ान का अनुभव है। 30 अप्रैल, 2026 को वे एयर मार्शल के पद से रिटायर हुए।
पायलट ऑफिसर से एयर मार्शल बनने तक का सफर
जितेंद्र मिश्रा ने अपने करियर के दौरान कई अहम कमांड और स्टाफ पदों पर काम किया, जिनमें फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर, एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट (ASTE) में चीफ टेस्ट पायलट और दो फ्रंटलाइन एयर बेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग के पद शामिल हैं।
जितेंद्र मिश्रा ने एयर हेडक्वार्टर (VB) में डायरेक्टर (ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप), प्रिंसिपल डायरेक्टर (ASR) और असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) के तौर पर भी काम किया।
बाद में, इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ बनने से पहले, उन्होंने ASTE के कमांडेंट और इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइजेशन एंड ट्रेनिंग) के डिप्टी चीफ के तौर पर काम किया।
जनवरी 2025 में, मिश्रा ने वेस्टर्न एयर कमांड का चार्ज संभाला, जो IAF के सबसे अहम ऑपरेशनल कमांड में से एक है।
इसके बाद उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान कमांड का नेतृत्व किया। यह ऑपरेशन पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों के खिलाफ चलाया गया था।
मिश्रा को ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ और ‘विशिष्ट सेवा मेडल’ से सम्मानित किया गया है। IAF में 39 साल से ज्यादा की सर्विस के बाद 31 दिसंबर, 2024 को एयर मार्शल पंकज मोहन सिन्हा के रिटायर होने पर, मिश्रा ने उनकी जगह वेस्टर्न एयर कमांड के चीफ का पद संभाला।
राम मंदिर ट्रस्ट में क्या काम करेंगे जितेंद्र मिश्रा?
जितेंद्र मिश्रा को अब राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा ने कहा है कि मंदिर के कामकाज में पेशेवर प्रशासन और पारदर्शिता लाने के लिए पूर्णकालिक CEO का होना बहुत जरूरी है।
ट्रस्ट का कहना है कि CEO बिना सरकारी दखल के काम करेंगे और जनरल सेक्रेटरी को रिपोर्ट करेंगे। जितेंद्र मिश्रा से संगठन के लिए लंबी अवधि की योजनाएं बनाने की भी उम्मीद की जाएगी।
CEO ही राम मंदिर के कानूनी, प्रशासनिक और वित्तीय मामलों के लिए जिम्मेदार होंगे और संगठन के आकार और प्रकृति के हिसाब से सिस्टम, प्रक्रियाएं और कामकाज के तरीके विकसित करेंगे।
इस पद से ट्रस्ट के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और कानूनी व नियामक जरूरतों के साथ-साथ ट्रस्ट डीड का पालन सुनिश्चित करने की भी उम्मीद है। CEO संगठन के कुशल प्रबंधन और भविष्य के विकास के लिए जिम्मेदार सर्वोच्च कार्यकारी अधिकारी के तौर पर काम करेंगे।
कैसे हुआ CEO का चयन?
CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया 6 जुलाई को शुरू हुई थी, जिसमें एक सिलेक्शन कमेटी ने 5,585 आवेदनों की स्क्रीनिंग की और ऑनलाइन इंटरव्यू के लिए 111 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया। इसके बाद 16 उम्मीदवारों को आमने-सामने के इंटरव्यू के लिए अयोध्या बुलाया गया।
स्क्रीनिंग कमेटी के चेयरमैन जस्टिस (रिटायर्ड) प्रमोद कोहली, कमेटी के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) वीके चतुर्वेदी और वैज्ञानिक-उद्योगपति सुरेश हवारे के साथ सोमवार देर रात अयोध्या पहुंचे। पैनल ने ट्रस्ट के चेयरमैन महंत नृत्य गोपाल दास महाराज को तीन शॉर्टलिस्ट किए गए नामों वाला एक सीलबंद लिफाफा सौंपा।
CEO के नाम पर आज बुधवार को बैठक हुई, जिसमें इन तीन नामों पर चर्चा हुई और उसके बाद जितेंद्र शर्मा के नाम के साथ CEO के नाम की घोषणा की गई।
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