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कांग्रेस आक्रामक, मगर सपा-आरजेडी ने साधी चुप्पी… जाति जनगणना पर क्यों बंटा विपक्ष?

Byadmin

Aug 28, 2026


नीलू रंजन, नई दिल्ली। आजादी के बाद पहली बार हो रही जाति जनगणना पर कांग्रेस को सहयोगी दलों का साथ नहीं मिल रहा है। जाति जनगणना कराने के तरीके पर कांग्रेस आक्रमक है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर जनगणना में ओबीसी जातियों को गिनने के तरीके पर आपत्ति जताई है, लेकिन कांग्रेस के सहयोगी दलों की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हैरानी की बात यह ओबीसी की राजनीति करने वाली पार्टियों ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है।

दरअसल जातियों की गणना के लिए जनगणना के फार्म में खुद अपनी जाति बताने को कहा गया है। कांग्रेस का कहना है कि इससे 2012 की सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना (एसईसीसी) की तरह लाखों जातियां सामने आ जाएगी, जिससे जाति गणना का पूरा उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।

जाति जनगणना पर कांग्रेस का हल्ला बोल 

2012 के एसईसीसी में जातियों की संख्या 46 लाख 70 हजार से अधिक दर्ज की गई थी। कांग्रेस जनगणना में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की तरह ओबीसी का अलग से कालम बनाने और उनमें ओबीसी जातियों को सूची लगाकर ड्राप डाउन से जाति चुनने का विकल्प देने की बात कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि बिहार और तेलंगाना में इसी तरीके से ओबीसी जातियों की गिनती की गई थी।

कांग्रेस की मांग को सरकार कई तवज्जो नहीं दे रही है। 17 अगस्त से हिमाचल, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में स्वयं गणना का काम शुरू हो चुका है, जिसमें लोगों को खुद अपनी जानकारी आनलाइन देने का विकल्प है। एक सितंबर से इन इलाकों में घर-घर जाकर जनगणना कर्मी लोगों की जानकारी जुटाएंगे। जाहिर है इसमें खुद अपनी जाति बतानी होगी और ड्राप डाउन से जाति चुनने का विकल्प नहीं है।

सपा-आरजेडी क्यों है मौन?

आशंका थी कि ओबीसी की राजनीति से सत्ता के शिखर तक पहुंचने वाली समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल जैसी पार्टियां इसका जमकर विरोध करेगी और कांग्रेस की तरह से ड्राप डाउन से जाति चुनने का विकल्प देने की मांग करेगी। जदयू के साथ सरकार में उप मुख्यमंत्री रहते हुए तेजस्वी यादव ने जाति गणना का पूरजोर समर्थन किया था।

215 जातियों के विकल्प में से किसी एक जाति को चुनने का विकल्प देते हुए जाति गणना भी करवाई थी। उसी जाति गणना के आधार पर बिहार सरकार ने ओबीसी के लिए 65 फीसद आरक्षण का आदेश भी जारी कर दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।

जाति जनगणना पर बिखरा विपक्ष

ओबीसी की राजनीति करने वाली करने वाली पार्टियों की चुप्पी को ओबीसी जातियों के टकराव और ओबीसी वोटबैंक के बिखराव से जोड़कर देखा जा रहा है। पहले की तरह अब कोई एक पार्टी या नेता ओबीसी की राजनीति का मसीहा होने का दावा नहीं कर सकता है। छोटी-छोटी ओबीसी जातियों की पार्टियों ने भाजपा का दामन थाम रखा है।

सत्ता में वापसी की कोशिश में जुटी सपा सामाजिक आधार बढ़ाने के लिए अन्य ओबीसी जातियों के साथ-साथ सवर्णों, दलितों और महिलाओं को जोड़ने की कोशिश कर रही है। जो ओबीसी की आक्रामक राजनीतिक से मुश्किल हो सकता है। यही स्थिति ओबीसी की राजनीति करने वाली अन्य पार्टियों की भी है।

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