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क्या आप किसी को भी दे सकते हैं गाली? SC ने बताया ‘अश्लीलता का अपराध’ है या नहीं

Byadmin

Jul 21, 2026


माला दीक्षित, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 294(बी) के दायरे को स्पष्ट करते हुए कहा है कि केवल गाली गलौज या अभद्र भाषा का इस्तेमाल अपने आप में अश्लीलता का अपराध नहीं माना जा सकता।

शीर्ष अदालत ने जोर देकर कहा कि कानून की नजर में अश्लीलता, भद्देपन और अपशब्दों से अलग अवधारणा है। कोर्ट ने कहा कि कानून की नजर में अश्लीलता, अभद्रता, गाली गलौज या अपशब्दों बीच अंतर करना जरूरी है। कानूनी तौर पर अश्लीलता का मतलब भद्दापन, गाली गलौज, या अपश्ब्द नहीं है।

गाली-गलौज अश्लीलता का अपराध नहीं: SC

सिर्फ गाली गलौज, अपशब्द और भद्दे शब्दों का इस्तेमाल, चाहें वे कितने भी बुरे या असभ्य क्यों न हों, उन्हें अश्लीलता के बराबर नहीं माना जा सकता। अश्लीलता के अपराध में जरूरी है कि शब्द कामुक हों, वासना को जगाने वाले हों और कमजोर मन मस्तिष्क को बिगाड़ने या भ्रष्ट करने की प्रवृति रखते हों।

शीर्ष अदालत ने कहा कि जो शब्द सिर्फ भद्दे या गाली गलौज वाले होते हैं, उनसे घृणा नफरत या हैरानी की भावना पैदा हो सकती है, लेकिन सिर्फ इसी वजह से वे कानून की नजर में अश्लील नहीं हो जाते। कोर्ट ने कहा कि कई पूर्व फैसलों में माना गया है कि गाली गलौज वाली भद्दी (वल्गर) और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का मतलब जरूरी नहीं है कि अश्लीलता ही हो।

किस केस में सुनाया फैसला?

न्यायमूर्ति संजय करोल और विपुल एम पंचोली की पीठ ने जमीन विवाद से जुड़े तमिलनाडु के एक मामले में 70 वर्षीय व्यक्ति की सजा के खिलाफ दाखिल अपील पर यह फैसला दिया है। कोर्ट ने उसकी अपील आंशिक रूप से स्वीकार कर ली है। पीठ ने आइपीसी की धारा 294(बी) (सार्वजनिक स्थान पर अश्लील शब्द बोलना) और धारा 506(2) (आपराधिक धमकी) के तहत सजा रद कर दी है।

हालांकि खतरनाक हथियार से जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाने के लिए आइपीसी की धारा 326 के तहत उसकी सजा बरकरार रखी है। लेकिन अपीलकर्ता की उम्र, सेहत की स्थिति और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि घटना जमीन विवाद से जुड़ी थी, उसकी सजा को बदल कर कोर्ट उठने तक की कैद और 50000 रुपये जुर्माने कर दी है।

पीठ ने सब किया क्लियर

पीठ ने फैसले में स्पष्ट किया कि अश्लीलता का अपराध साबित करने के लिए न सिर्फ यह दिखाना जरूरी है कि संबंधित शब्द न केवल सार्वजनिक स्थान पर बोले गए बल्कि वे कामुक प्रकृति के हों। कामुक इच्छाओं को भड़काने वाले हों और कमजोर मन मस्तिष्क को बिगाड़ने या भ्रष्ट करने की प्रवृत्ति रखते हों।

केवल अपमानजनक या असभ्य भाषा का प्रयोग इन मानकों को स्वत: पूरा नहीं करता। ऐसे शब्द भले ही असभ्य या आपत्तिजनक हों लेकिन जबतक वे कामुक या नैतिक रूप से भ्रष्ट करने वाले न हों, उन्हें अश्लील नहीं कहा जा सकता।

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