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क्या ट्रांसजेंडर संशोधन क़ानून ने ट्रांस पुरुषों को इसके दायरे से बाहर कर दिया?

Byadmin

May 20, 2026


समर एलजीबीटीक्यूआईए+ समुदाय के अधिकारों और मानसिक स्वास्थ्य के लिए काम करते हैं

इमेज स्रोत, Tej Bahadur Singh

इमेज कैप्शन, समर एलजीबीटीक्यूआईए+ समुदाय के अधिकारों और मानसिक स्वास्थ्य के लिए काम करते हैं

साल 2021 की बात है. समर शर्मा 18 साल के हो चुके थे जो हरियाणा के करनाल ज़िले के एक गांव के रहने वाले हैं. वे अपने घरवालों को समझाते-समझाते थक चुके थे कि वे अपने जन्म के समय दी गई लैंगिक पहचान के साथ अब नहीं जी सकते. उन्होंने घर छोड़ दिया.

समर एक ट्रांसजेंडर पुरुष हैं. अब वे दिल्ली में रहकर एलजीबीटीक्यूआईए+ समुदाय के अधिकारों और मानसिक स्वास्थ्य के लिए काम करते हैं.

पिछले पाँच सालों में उन्होंने सबसे बड़ा सपना पूरा किया. उन्होंने सरकारी पहचान पत्रों पर अपना जेंडर ‘पुरुष’ दर्ज करवाया. यह उनके लिए क़ानूनी मान्यता, सम्मान और गरिमा के साथ जीने के लिए ज़रूरी था.

समर ने बीबीसी हिन्दी को बताया, “जब मुझे अपना पैन कार्ड मिला, जिसमें जेंडर के कॉलम में ‘पुरुष’ लिखा था तो मैं खुशी से रो पड़ा. मुझे ऐसा लगा जैसे कि मैंने कोई ट्रॉफ़ी जीती हो. वह कामयाबी हासिल की हो जो मैं हमेशा चाहता था.”

समर के लिए सरकारी पहचान पत्रों में उनकी ख़ुद की पहचान (सेल्फ आइडेंटिटी) का सही तरह से दर्ज होना ही उनके लिए असली मान्यता और वैधता की निशानी है.

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