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क्या 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई पेमेंट पर लगेगा शुल्क?

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Aug 6, 2026


यूपीआई से पेमेंट करती महिला

इमेज स्रोत, Debajyoti Chakraborty/NurPhoto via Getty Images

इमेज कैप्शन, पीएम मोदी के मुताबिक जुलाई में भारत का यूपीआई से लेनदेन 23.66 अरब के साथ अपने सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है.

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भारत में मंगलवार को संसद में भुगतान कानूनों में प्रस्तावित संशोधन पेश किए गए. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक ये यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (यूपीआई) के ज़रिए होने वाले लेनदेन पर मर्चेंट फ़ीस दोबारा लागू होने की दिशा में उठाया गया एक क़दम है.

इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का लंबे समय से कहना रहा है कि डिजिटल भुगतान का विस्तार बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है, क्योंकि पेमेंट कंपनियों को यूपीआई लेनदेन पर कोई फ़ीस नहीं मिलती.

रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि ‘इसके तहत डिजिटल भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने की अनुमति दी जा सकती है. यह संशोधन एमडीआर वसूलने का कानूनी आधार तैयार करता है. हालांकि, अभी यह तय नहीं किया गया है कि फ़ीस कितनी होगी या किन लेनदेन पर लागू होगी.’

मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) वह फ़ीस है, जो डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के बदले कारोबारी, बैंकों और पेमेंट सेवा देने वाली कंपनियों को देते हैं.

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