• Sun. Aug 23rd, 2026

24×7 Live News

Apdin News

गंगा बाढ़ क्षेत्र नियमों में बदलाव पर एनजीटी का केंद्र को नोटिस, याचिकाकर्ता ने उठाए गंभीर सवाल

Byadmin

Aug 23, 2026


जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। गंगा बाढ़ क्षेत्र के नियमों में बदलाव का मामला राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) पहुंच गया है। एनजीटी ने गंगा बाढ़ क्षेत्र आदेश 2026 की अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने यह नोटिस 19 अगस्त को याचिकाकर्ता डाक्टर अमित कुमार की याचिका पर जारी किया। इस याचिका में गंगा नदी (पुनरुद्धार, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण (द्वितीय संशोधन) आदेश 2026 की अधिसूचना को चुनौती देते हुए रद करने की मांग की गई है।

मामले में अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी।यह मामला केंद्र सरकार की सात अगस्त की अधिसूचना से जुड़ा है। इस अधिसूचना के जरिये गंगा नदी (पुनरुद्धार, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 में संशोधन किया गया है। याचिकाकर्ता ने अधिसूचना को रद करने की मांग करते हुए इसे पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 की धारा तीन के खिलाफ बताया है।

याचिका में कहा गया है कि इस अधिसूचना के जरिए गंगा बेसिन को प्राप्त मूलभूत कानूनी संरक्षण को कमजोर कर दिया गया है। याचिका में सबसे प्रमुख आपत्ति 2016 के आदेश के पैराग्राफ 4 (9) में किए गए बदलाव को लेकर है। याचिकाकर्ता का कहना है कि पहले गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे बाढ़ क्षेत्रों को सुरक्षित रखने के संबंध में स्पष्ट प्रविधान था।

नए संशोधन में इसे बदलकर कहा गया है कि नदी के किनारे और बाढ़ क्षेत्रों को प्रदूषण के स्रोतों और दबाव को कम करने तथा प्राकृतिक भूजल पुनर्भरण के कार्य को बनाए रखने के लिए आवश्यक उपाय के जरिये सुरक्षित रखा जाएगा। कहा गया है कि 2016 के आदेश में गंगा और उसकी सहायक नदियों के तट तथा बाढ़ क्षेत्र को प्रदूषण और निर्माण से बचाने के लिए विशेष प्रविधान किए गए थे।

नए संशोधन में उस प्रविधान की भाषा बदल दी गई है। आशंका जताई गई है कि इस बदलाव से प्राकृतिक बाढ़ क्षेत्र में निर्माण पर लगी स्पष्ट रोक कमजोर हो सकती है।

केंद्र सरकार ने संशोधन में सक्रिय बाढ़ क्षेत्र की नई परिभाषा जोड़ी

केंद्र सरकार ने हालिया संशोधन में सक्रिय बाढ़ क्षेत्र की नई परिभाषा जोड़ी है और ‘निर्माण मुक्त क्षेत्र’ शब्द को हटा दिया है। इसके तहत गंगा व उसकी सहायक नदियों का वह क्षेत्र सक्रिय बाढ़ क्षेत्र माना जाएगा, जो पांच साल में एक बार आने वाली बाढ़ के दौरान पानी में डूबता हो।

संशोधन में फ्लड प्लेन में सक्रिय बाढ़ क्षेत्र के अलावा दो और क्षेत्र शामिल किए गए हैं। पांच से 25 साल में आने वाली बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र को रेगुलेटरी जोन, जबकि 25 से 100 साल में आने वाली बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र को वार्निंग जोन कहा गया है।

याचिका में इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए कहा गया है कि बाढ़ क्षेत्र की सुरक्षा केवल पांच साल में आने वाली बाढ़ के आधार पर नहीं की जानी चाहिए। गंगा के पूरे प्राकृतिक बाढ़ क्षेत्र की पहचान जरूरी है, क्योंकि बड़ी बाढ़ 25 या 100 साल के अंतराल में भी आ सकती है।

याचिका में गंगा और उसकी सहायक नदियों के पूरे 100 वर्षीय बाढ़ क्षेत्र की उपग्रह और जीआइएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) तकनीक से मैपिंग और सीमांकन कराने की मांग की गई है। इसके साथ ही याचिका में मांग है कि इन सीमाओं के भीतर किसी भी राज्य प्राधिकरण को व्यावसायिक रियल एस्टेट या औद्योगिक निर्माण के लिए पूर्व अनुमति, मंजूरी या लाइसेंस जारी करने से रोका जाए।

By admin