डिजिटल डेस्क, आइजोल। एंटरप्रेन्योर और कांग्रेस नेता मेरियम एल. ह्रांगचल ने सोमवार, 24 अगस्त को ‘मिजो मैरिज, डिवोर्स एंड इनहेरिटेंस ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 2014’ की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है।
मेरियम का मानना है कि इस कानून के तहत मिजोरम की महिलाओं से अधिकार छीन लिए गए हैं, अगर वह जो मिजो समुदाय से बाहर शादी करती हैं।
‘महिलाओं को नहीं मिल रहे अधिकार’
लाल थनहवला की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार के बनाए गए इस कानून को मेरियम ने महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण बताया और कहा कि ये कानून पूरी तरह मिजो पुरुषों के पक्ष में है।
पूर्व डिप्टी सीएम लालहमिंगथांगा की बेटी मेरियम ह्रांगचल ने CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच को बताया कि यह कानून, जिसने पारंपरिक कानूनों को कानूनी रूप दिया था, मिजो जनजाति के किसी भी व्यक्ति पर लागू होता है और उन शादियों पर भी लागू होता है जिनमें पुरुष मिजो जनजाति का हो।
मेरियम ने कोर्ट को बताया कि 2014 का यह कानून उन मिजो महिलाओं को शादी, संपत्ति और विरासत से जुड़े व्यापक सामुदायिक कानूनी ढांचे का लाभ नहीं देता है जो मिजो समुदाय से बाहर शादी करती हैं।
मेरियम ने महिलाओं के इन कानूनों के हनन से यह संविधान के आर्टिकल 14 और 21 के तहत उनके समानता, सम्मान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है।
मिजो महिला के गैर-मिजो पुरुष से शादी करने पर सवाल
मेरियम ने अपने खुद के वैवाहिक रिश्ते का उदाहरण देते हुए बताया कि यह कानून मिजो महिलाओं की स्वतंत्र पहचान को कमतर करता है और उन्हें 2014 के कानून के तहत मिलने वाले फायदों से वंचित रखता है।
यह कानून मिजो पुरुष और गैर-मिजो महिला के बीच शादी पर तो लागू होता है, लेकिन मिजो महिला और गैर-मिजो पुरुष के बीच शादी को इसमें शामिल नहीं करता है।
मेरियम ने कोर्ट को बताया, ‘ऐसे प्रावधानों का असर यह होता है कि जो मिजो महिलाएं गैर-मिजो पुरुषों से शादी करती हैं और ऐसी शादियों से पैदा होने वाले बच्चे, मिजो समुदाय से जुड़े होने के बावजूद इस कानूनी व्यवस्था से बाहर रह जाते हैं।’
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को दिए निर्देश
CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि उनकी याचिका में उठाया गया मुद्दा महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने मेरियम से पूछा कि वह हाई कोर्ट क्यों नहीं गईं।
इस सवाल पर मेरियम के वकील ने कहा कि समुदाय छोटा होने के कारण, उन्हें डर था कि अगर उनकी याचिका पर गुवाहाटी हाई कोर्ट की आइजोल बेंच सुनवाई करती है तो उनकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
बेंच ने मेरियम की चिंता को समझा और गुवाहाटी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुरोध किया कि वे उनकी याचिका को आइजोल बेंच को भेजे बिना गुवाहाटी में ही सुनें।
यह भी पढ़ें- ‘प्राइवेट कंपनियां कर रहीं पर्सनल डेटा का गलत इस्तेमाल’, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिए लगाम लगाने के निर्देश