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‘ज़िंदगी जीने के दो ही तरीक़े होते हैं’: ‘रंग दे बसंती’ जैसी फ़िल्मों और जेन ज़ी प्रोटेस्ट के बीच आख़िर रिश्ता क्या है?

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Aug 2, 2026


रंग दे बसंती

इमेज स्रोत, Getty Images/Facebook@Rang De Basanti

इमेज कैप्शन, ‘रंग दे बसंती’ फ़िल्म के गीतों को जंतर-मंतर पर हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट में खूब गाया गया

“ज़िंदगी जीने के दो ही तरीक़े होते हैं. एक, जो हो रहा है उसे होने दो और सब कुछ बर्दाश्त करते जाओ. दूसरा, ज़िम्मेदारी उठाओ और उसे बदलने की कोशिश करो.” – रंग दे बसंती (2006)

प्रसून जोशी ने ‘रंग दे बसंती’ फ़िल्म के डायलॉग और गीत लिखे थे.

विद्यार्थी आंदोलनों में जब इस फ़िल्म के गीत फिर से लोकप्रिय हो रहे थे, उसी दौरान जोशी की अध्यक्षता वाले सेंसर बोर्ड पर सवाल उठे, क्योंकि ओटीटी पर रिलीज़ हुई सतलुज फ़िल्म को हटा दिया गया था.

2010 के दशक के फ़िल्मी सितारे इमरान ख़ान ने विद्यार्थियों का समर्थन किया. इसके बाद उन्हें इंस्टाग्राम पर लोगों का काफ़ी प्यार मिला.

फ़िल्मों में अक्सर ख़लनायक की भूमिकाएँ निभाने वाले प्रकाश राज के समर्थन में भी लोगों ने खुलकर अपनी भावनाएँ ज़ाहिर कीं. यह अपने आप में एक दिलचस्प विरोधाभास था.

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