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दिल्ली के जंतर-मंतर पर जेन ज़ी युवाओं का प्रदर्शन देश ही नहीं, दुनियाभर में चर्चा का विषय बना था. सोशल मीडिया पर प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो करोड़ों लोगों तक पहुंचीं और 36 दिन बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के साथ यह प्रदर्शन ख़त्म हो गया.
लेकिन इसका असर ख़त्म होता नहीं दिख रहा. सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें सरकारी स्कूल के बच्चे बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर प्रदर्शन करते नज़र आ रहे हैं.
ऐसा ही एक वीडियो उत्तर प्रदेश के फ़तेहपुर से भी सामने आया है.
फ़तेहपुर ज़िले के विजयीपुर ब्लॉक स्थित किशनपुर कस्बे के सर्वोदय इंटर कॉलेज में बीते मंगलवार को छात्र बड़ी संख्या में प्रदर्शन करते नज़र आए.
स्कूल में बेंच, पंखे, साफ़ पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने यहां पढ़ने वाले बच्चों को इस क़दर परेशान कर दिया कि वे धरने पर बैठने को मजबूर हो गए.
28 जुलाई को स्टूडेंट्स कॉलेज के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए.
इस बीच स्कूल प्रबंधन और स्थानीय पुलिसकर्मियों ने स्टूडेंट्स को समझाने की कोशिश की, लेकिन स्टूडेंट्स अपनी मांगों पर डटे रहे.
हाथ में अपनी मांगों की तख्तियां और भीमराव आंबेडकर की तस्वीर लिए स्टूडेंट्स नारे लगाते रहे और करीब चार घंटे तक प्रदर्शन किया.
इनका कहना था कि जब तक ज़िला अधिकारी मौके पर पहुंचकर उन्हें मांगें पूरी करने का आश्वासन नहीं दे देते, तब तक वे अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे.
बढ़ते विरोध को देखते हुए ज़िला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) राकेश कुमार, नायब तहसीलदार नितिन कुमार और अन्य प्रशासनिक अधिकारी विद्यालय पहुंचे.
स्टूडेंट्स की मांगें
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विरोध प्रदर्शन को देखते हुए अधिकारियों को स्कूल पहुंचना पड़ा. इन अधिकारियों ने स्टूडेंट्स से बात की और उनकी आठ प्रमुख मांगों में से सात को लिखित रूप में स्वीकार कर लिया.
छात्रों की आठ मांगों में पीने के साफ़ पानी की व्यवस्था, हर कक्षा में चार पंखे, शौचालयों की नियमित सफ़ाई, कक्षा 6 से 8 तक के स्टूडेंट्स के लिए पर्याप्त फ़र्नीचर, मध्याह्न भोजन (एमडीएम) की गुणवत्ता में सुधार, छात्रों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई, खेल मैदान की साफ़-सफ़ाई और कॉलेज में विज्ञान वर्ग की मान्यता शामिल थी.
फ़तेहपुर के ज़िला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार ने कहा कि स्टूडेंट्स की ओर से लिखित रूप में रखी गई मांगों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
उन्होंने कहा, “बच्चों की जो लिखित मांगें थीं, उनमें बिजली, पंखे, पानी और मिड-डे मील से जुड़ी समस्याएं शामिल थीं. हमने उन्हें लिखित रूप में बताया है कि हर कमरे में चार पंखे लगाए जाएंगे, खुली वायरिंग को ठीक किया जाएगा, मिड-डे मील का मेन्यू सुधारा जाएगा, कक्षा छह, सात और आठ के स्टूडेंट्स के लिए बेंच की व्यवस्था की जाएगी और वाटर कूलर लगाया जाएगा. जो काम तुरंत हो सकते हैं, उन्हें जल्द पूरा किया जाएगा. इसकी जानकारी बच्चों को लिखित रूप में दे दी गई है.”
ज़िलाधिकारी ने क्या बताया
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फ़तेहपुर की जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स ने भी एक बयान जारी किया है.
बयान में उन्होंने कहा कि स्टूडेंट्स की आठ में से सात मांगों पर तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
उन्होंने कहा कि सिर्फ़ विज्ञान संकाय की मान्यता से जुड़ी मांग को नियमानुसार प्रयोगशाला बनने के बाद ही पूरा किया जा सकता है.
उन्होंने कहा, “सुबह सूचना मिली थी कि कुछ स्टूडेंट्स सर्वोदय इंटर कॉलेज में अपनी मांगों को लेकर एकत्र हुए हैं. इसके बाद डीआईओएस, संबंधित एसडीएम और थाना प्रभारी को मौके पर भेजा गया.”
“स्टूडेंट्स से बातचीत में उनकी मांगें सामने आईं. खाने, शौचालय और साफ़-सफ़ाई समेत पहली छह मांगों पर काम शुरू कर दिया गया है. वहीं विज्ञान संकाय की मान्यता देने की मांग पर प्रयोगशाला के निर्माण के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.”
प्रिंसिपल ने क्या कहा
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स्कूल के प्रिंसिपल लाल बहादुर सिंह का कहना है कि प्रदर्शन के अगले ही दिन से अधिकांश मांगों पर अमल शुरू कर दिया गया है.
उन्होंने कहा, “स्टूडेंट्स की जो भी मांगें थीं, उन पर अमल करते हुए हमने ज़्यादातर काम करा दिए हैं. बाकी काम भी जारी है. स्कूल में पहले की तरह नियमित कक्षाएं चल रही हैं और शिक्षक पढ़ा रहे हैं.”
हालांकि, इस प्रदर्शन की चर्चा सोशल मीडिया पर अब भी जारी है. प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले छात्र अंकुर भी ऑनलाइन चर्चा का विषय बने हुए हैं.
अंकुर इससे पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में भी शामिल हुए थे.
सोशल मीडिया पर कई लोग मान रहे हैं कि जंतर-मंतर के अनुभव से उन्हें अपने स्कूल में स्टूडेंट्स को संगठित करने की प्रेरणा मिली. हालांकि, बीबीसी स्वतंत्र रूप से इस दावे की पुष्टि नहीं करता.
फ़तेहपुर के सरकारी कॉलेज का यह उदाहरण बताता है कि ये छात्र न केवल अपने अधिकारों को समझ रहे हैं, बल्कि उन्हें यह भी मालूम है कि व्यवस्था में सुधार कैसे किया जाए.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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