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मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर विपक्षी सांसदों का प्रदर्शन तीसरे दिन 8 अक्तूबर को भी जारी है.
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्षी इंडिया ब्लॉक के सांसद राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी.
इससे पहले विपक्षी सांसद दोपहर में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से आयोजित लंच में शामिल हुए.
लंच के बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खड़गे समेत विपक्षी सांसद तीन बसों में सवार होकर गांधी स्मारक राजघाट के लिए रवाना हुए. विपक्ष ने वहां शांतिपूर्ण धरना देने की बात कही है. समाजवादी पार्टी, शिवसेना-यूबीटी और एनसीपी-एसपी के सांसद भी आज की बैठक में शामिल हुए.
राहुल गांधी ने राजघाट के लिए रवाना होने से पहले कहा, “राज्य सभा और लोकसभा के 300 सांसद पीसफ़ुल प्रोटेस्ट करना चाह रहे हैं. दो दिन से हमें प्रोटेस्ट नहीं करने दिया जा रहा है. पहले दिन हमें इलेक्शन कमीशन के दफ़्तर के सामने रोका. उसके बाद हमने कहा कि हम जंतर-मंतर जा रहे हैं. वहां जाने से भी रोका. हमारे लोगों को मारा.”
उन्होंने आरोप लगाया, “नरेंद्र मोदी, अमित शाह, मोहन भागवत और ज्ञानेश कुमार ने आपराधिक षडयंत्र करके हिन्दुस्तान को हाइजैक किया है. संविधान को नष्ट किया है. वोट चोरी की है. ये हमारी गारंटी है कि इन चारों को हम इंसाफ़ के कटघरे में लाएंगे.”
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प्रदर्शनों का तीसरा दिन
विपक्ष की मुख्य मांग ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की है. विपक्ष एसआईआर यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है.
राहुल गांधी और विपक्षी दलों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर उनकी चिंताओं का जवाब मिलना चाहिए.
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गुरुवार को राजघाट पर प्रदर्शन की घोषणा के बाद दिल्ली पुलिस ने वहां भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लगा दिए हैं. राजघाट और आसपास के इलाक़े में सुरक्षा बढ़ाई गई है और बड़ी संख्या में पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है.
विपक्ष ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाक़ात का समय मांगा है. कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के मुताबिक़, विपक्षी नेताओं ने 2 अक्तूबर को पहली चिट्ठी भेजी थी और 5 अक्तूबर को नेताओं के नामों के साथ दोबारा अनुरोध किया था. 8 या 9 अक्तूबर को राष्ट्रपति से मिलने का समय चाहता है.
विपक्ष का कहना है कि वह ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े तक अपना आंदोलन जारी रखेगा.
दूसरी तरफ़, चुनाव आयोग और बीजेपी विपक्ष के आरोपों को ख़ारिज करते रहे हैं. चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर मतदाता सूची को अपडेट और साफ़ करने की प्रक्रिया है, जबकि विपक्ष इसे लेकर गंभीर सवाल उठा रहा है.
इससे पहले, पिछले दो दिनों में प्रदर्शन के दौरान कई बार पुलिस और विपक्षी सांसदों के बीच टकराव की स्थिति बनी. 6 अक्तूबर को विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग की ओर मार्च किया था.
इसके बाद राहुल गांधी समेत कई सांसदों ने आकाशवाणी भवन के पास धरना दिया. 7 अक्तूबर को विपक्षी सांसदों ने जंतर-मंतर जाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया और कई नेताओं को हिरासत में लिया.
6 अक्तूबर के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस की ओर से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कुछ नेताओं के ख़िलाफ़ एफआईआर भी दर्ज की गई है. उन पर पुलिसकर्मियों के साथ कथित तौर पर मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप लगाए गए हैं.
बेंगलुरु में सीजेपी का प्रदर्शन
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8 अक्तूबर को ही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े और एसआईआर के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया.
बड़ी संख्या में सीजेपी समर्थक फ्रीडम पार्क में जुटे. यहां सीजेपी के मंच पर यूट्यूबर ध्रुव राठी और अभिनेता प्रकाश राज भी नज़र आए.
कॉकरोच जनता पार्टी ने मांग की, ‘एसआईआर बंद करो.’
ध्रुव राठी ने आरोप लगाया, “लोगों के नाम वोटिंग लिस्ट से हटाए गए और ज्ञानेश कुमार ने ज़रूरत नहीं समझी किसी को बताने की कि कौन थे ये लोग, क्या थे इनके नाम, इनका क्या पता था. जब तक सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं आया, ज्ञानेश कुमार ने ये बातें छिपाकर रखीं.”
उन्होंने कहा, “जब तक कहा नहीं जा रहा है तब तक चुनाव आयोग कुछ बता नहीं रहा है. पारदर्शिता शून्य और जवाबदेही भी शून्य.”
ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ पटना में आरजेडी का मार्च
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राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता और बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने गुरुवार को पटना में एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को ज़िम्मेदार ठहराते हुए मार्च निकाला.
राष्ट्रीय जनता दल इंडिया गठबंधन का हिस्सा है. पार्टी ने पटना में अपना मार्च विधानसभा के सामने शहीद स्मारक से शुरू किया. पार्टी के कार्यकर्ता लोक भवन की ओर बढ़ने लगे लेकिन पुलिस ने उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त के दफ़्तर के नज़दीक रोक लिया.
इस दौरान तेजस्वी यादव पुलिस बैरिकेड पर चढ़ते दिखे.
एक सीनियर अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, ”जब उन्होंने सुरक्षा के लिए लगाए गए बैरिकेड्स को पार करने की कोशिश की, तो पुलिस उन्हें वाहन में बैठाकर लोक भवन ले गई.”
तेजस्वी यादव ने कहा, ”फ़र्ज़ी चुनाव कराकर ज्ञानेश कुमार ने बीजेपी के सत्ता में आने का रास्ता साफ़ किया है. जब सच्चाई सामने आई, तो हम सभी लोकतंत्र को बचाने के लिए एकजुट होना चाहते हैं, ताकि आगे से निष्पक्ष चुनाव हों और सभी राजनीतिक दलों के लिए समान अवसर का स्तर बना रहे.”
42 पूर्व जजों ने चुनाव आयोग के पक्ष में लिखा खुला ख़त
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इस बीच समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, 42 पूर्व जजों ने खुला पत्र लिखकर ‘चुनाव आयोग को कमज़ोर करने की कोशिशों’ के ख़िलाफ़ चेतावनी दी है.
इस पत्र में पूर्व जजों ने चुनाव आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को कथित तौर पर कमज़ोर करने की कोशिशों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले पूर्व जजों ने ‘बिना किसी ठोस सबूत के लगाए जा रहे ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर सवाल उठाया है.
उन्होंने चेतावनी दी है कि संवैधानिक संस्थाओं को बार-बार ”चोर” और ”मिलीभगत” बताने से लोकतंत्र में जनता का विश्वास कमज़ोर होने का ख़तरा है.
पत्र में कहा गया है, “संस्थाओं की आलोचना करना लोकतांत्रिक अधिकार है. लेकिन उन्हें बदनाम करना नहीं.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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