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टीएमसी के बाग़ी सांसदों और एनसीपीआई के बहाने, भारत के हज़ारों ‘काग़ज़ी दलों’ की पड़ताल

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Jun 20, 2026


बागी टीएमसी सांसदों ने रविवार को नई दिल्ली में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से उनके आवास पर मुलाकात की

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, तृणमूल के कई बाग़ी सांसदों ने अपने गुट का नेशनलिस्ट सिटिज़ंस पार्टी ऑफ़ इंडिया (एनसीपीआई) के साथ विलय करने की घोषणा की

    • Author, शुभांगी मिश्रा, जैस्मिन निहलानी और मयूरी सोम
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

15 जून की तपती दोपहर को पश्चिम बंगाल के हावड़ा ज़िले के हाटगाछा गांव में एक दो-मंज़िला इमारत के बाहर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल का दस्ता, राज्य के कई पुलिस अधिकारी और कई पत्रकार पहुंचे.

कोलकाता से लगभग एक घंटे की दूरी पर स्थित यह इलाक़ा रातों-रात राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन गया था. यह इमारत नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया (एनसीपीआई) का मुख्यालय है.

एक दिन पहले तक इस पार्टी का राजनीतिक परिचय सिर्फ़ इतना था कि उसने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में दो सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे.

लेकिन 14 जून को तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को पत्र देकर इस गुमनाम दल में विलय की घोषणा कर दी.

पार्टी की अध्यक्ष शिउली कुंडू हैं, जो कलकत्ता हाई कोर्ट की वकील हैं. इसके उपाध्यक्ष उत्तिया कुंडू हैं, जो गणित के शिक्षक, स्वयंभू ‘मोटिवेशनल स्पीकर’ और एक स्थानीय अख़बार के संपादक हैं.

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