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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा के फौरन बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मंगलवार को चीन के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर जा रहे हैं.
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बीते शनिवार इसकी जानकारी देते हुए कहा था कि यह स्टेट विज़िट चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के न्योते पर हो रही है. क्रेमलिन ने भी पहले एक बयान जारी कर पुतिन के चीन दौरे की पुष्टि की थी.
इससे पहले ट्रंप ने 13 से 15 मई तक चीन का आधिकारिक दौरा किया था, जिस पर पूरी दुनिया की नज़रें थीं क्योंकि क़रीब एक दशक में यह किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की पहली चीन यात्रा थी.
हालांकि इस यात्रा में ट्रंप अमेरिका की शीर्ष टेक कंपनियों के सीईओ के साथ पहुंचे थे, लेकिन यात्रा समाप्त होने के बाद भी किसी डील का एलान नहीं हुआ.
इसके ठीक तीन दिन बाद अब रूसी राष्ट्रपति पुतिन बीजिंग पहुंचेंगे.
चीनी विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि पुतिन और शी जिनपिंग द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा करेंगे, चीन और रूस के बीच व्यापक साझेदारी और रणनीतिक सहयोग को और गहरा करने के तरीक़ों पर बात करेंगे और अहम अंतरराष्ट्रीय व क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे.
दोनों देश उच्च स्तर पर एक संयुक्त बयान और कई द्विपक्षीय दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करने की योजना बना रहे हैं.
इसके अलावा चीन और रूस के राष्ट्राध्यक्ष ‘चीन-रूस शिक्षा वर्ष’ के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे.
संबंधों को और गहरा करने की कोशिश
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रूस ने कहा कि पुतिन की चीन यात्रा अच्छे पड़ोसी और दोस्ताना सहयोग संधि पर हस्ताक्षर की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर हो रही है.
यह संधि 2001 में मॉस्को में उस समय के चीनी राष्ट्रपति जियांग ज़ेमिन और पुतिन के बीच हुई थी.
पुतिन और शी जिनपिंग की पिछली मुलाक़ात पिछले साल सितंबर में हुई थी, जब दोनों ने शंघाई सहयोग संगठन के वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था.
इसके बाद वे जापान के ख़िलाफ़ प्रतिरोध युद्ध में जीत की 80वीं वर्षगांठ पर 3 सितंबर को आयोजित सैन्य परेड में शामिल होने के लिए बीजिंग गए थे.
उस परेड में उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन भी मौजूद थे.
पिछले मई में शी जिनपिंग ने भी पुतिन के निमंत्रण पर मॉस्को की चार दिन की राजकीय यात्रा की थी और सोवियत संघ की ‘महान देशभक्ति युद्ध’ में जीत की 80वीं वर्षगांठ के समारोह में हिस्सा लिया था.
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राष्ट्रपति बनने के बाद शी जिनपिंग की यह रूस की 11वीं यात्रा थी और रूस वह देश है जहां उन्होंने सबसे ज़्यादा यात्राएं की हैं.
उस समय शी जिनपिंग ने भाषण देते हुए कहा था कि चीन और रूस ‘ऐसे अच्छे पड़ोसी हैं जिन्हें अलग नहीं किया जा सकता, ऐसे सच्चे दोस्त हैं जो सुख-दुख साझा करते हैं और ऐसे अच्छे साझेदार हैं जो एक-दूसरे की सफलता में भागीदार बनते हैं.”
रॉयटर्स के मुताबिक़, पुतिन और शी जिनपिंग पिछले कुछ सालों में 40 से ज़्यादा बार मिल चुके हैं.
दोनों नेताओं ने फ़रवरी 2022 में ‘असीमित’ रणनीतिक साझेदारी पर भी हस्ताक्षर किए थे, जो रूस के यूक्रेन पर हमले के फ़ौरन बाद हुआ था.
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और अलगाव बढ़ा, लेकिन चीन ने न तो रूस की सार्वजनिक आलोचना की और न ही प्रतिबंधों का समर्थन किया.
दोनों देशों ने राजनीतिक और आर्थिक सहयोग जारी रखा और चीन पर रूस की आर्थिक निर्भरता लगातार बढ़ती गई.
चीन और रूस ने पिछले सितंबर में मंगोलिया के रास्ते ‘पावर ऑफ साइबेरिया 2’ प्राकृतिक गैस पाइपलाइन के निर्माण को शुरू करने के लिए क़ानूनी रूप से बाध्यकारी समझौते पर भी हस्ताक्षर किए थे और दो अन्य रास्तों से प्राकृतिक गैस आपूर्ति बढ़ाने पर सहमति जताई थी.
रूसी सरकारी मीडिया आरटी के मुताबिक़, रूसी राष्ट्रपति के सहयोगी यूरी उशाकोव ने कहा कि पुतिन के 2026 में दो बार चीन जाने की उम्मीद है. नवंबर में शेनझेन में होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भी उनकी एक और यात्रा तय है.
चीन-अमेरिका बैठक पर रूस की थी नज़र
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उन्होंने कहा, “अगर चीन और अमेरिका के बीच कोई समझौता हुआ है या होने वाला है, तो यह हमारे चीनी दोस्तों के हित में है और हमें इसकी ख़ुशी होगी.”
लावरोव ने कहा, “चीन और रूस के संबंध पारंपरिक सैन्य और राजनीतिक गठबंधन से भी ज़्यादा गहरे और मज़बूत हैं. यह एक नया रिश्ता है जो किसी भी अन्य कारक से ज़्यादा वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित कर सकता है.”
पुतिन की चीन यात्रा के समय ने अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचा है.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने सूत्रों के हवाले से कहा कि यह पुतिन की नियमित यात्रा है और किसी बड़े सैन्य परेड या भव्य स्वागत समारोह की उम्मीद नहीं है.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने यह भी कहा कि यह पहला मौक़ा है जब चीन एक ही महीने में दो देशों के नेताओं की मेज़बानी कर रहा है.
इससे यह संकेत मिलता है कि चीन दोनों देशों के साथ संबंधों को संतुलित रखने की कोशिश कर रहा है. साथ ही वो मुश्किल दौर से गुज़र रही दुनिया में ख़ुद को एक अहम शक्ति के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है.
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राजनीतिक संस्कृति के विद्वान और समसामयिक मामलों के टिप्पणीकार हुआंग वेइगुओ का मानना है कि चीन, अमेरिका और रूस के संबंधों में अलग-अलग तरह की शक्ति प्रतिस्पर्धा चल रही है और ट्रंप की चीन यात्रा से चीन-रूस संबंध प्रभावित नहीं होंगे.
उन्होंने कहा, “ऊपरी तौर पर अमेरिका और रूस विरोधी दिखते हैं, लेकिन अमेरिका रूस-यूक्रेन युद्ध में भूमिका निभाना चाहता है और खुद को शांति स्थापित करने वाले देश के रूप में पेश कर सकता है.”
उनका मानना है कि इन तीन देशों में इस समय चीन के पास ‘सबसे ज़्यादा पत्ते’ हैं.
हुआंग वेइगुओ ने कहा, “ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद से अमेरिका और यूरोपीय देशों के संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं. हम देख रहे हैं कि यूरोपीय देश भी लगातार चीन की यात्रा कर रहे हैं और कुछ हद तक कम टकराव वाले संबंध बनाए रख रहे हैं.”
उनका मानना है कि अपेक्षाकृत अराजक माहौल में चीन कूटनीति के ज़रिए कुछ पश्चिमी देशों के साथ संबंध स्थापित करने की कोशिश कर सकता है और “विरोधी पक्ष के सहयोगियों को अपने पक्ष में ला सकता है.”
ट्रंप की यात्रा में दिलचस्पी
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दूसरी ओर, ट्रंप ने चीन यात्रा समाप्त करने के बाद शी जिनपिंग को सितंबर में व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण दिया.
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भी पुष्टि की कि शी जिनपिंग इस साल अमेरिका जाएंगे.
पुतिन की चीन यात्रा की ख़बर ट्रंप की चीन यात्रा समाप्त होने के 24 घंटे से भी कम समय बाद सामने आई और पुतिन की यात्रा ट्रंप की यात्रा के एक हफ़्ते बाद हो रही है.
रूसी सरकारी समाचार एजेंसी तास ने राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के हवाले से कहा कि क्रेमलिन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की चीन यात्रा से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों पर क़रीबी नज़र रख रहा है और रूसी राष्ट्रपति पुतिन की चीन यात्रा के दौरान, इस बारे में प्रत्यक्ष जानकारी हासिल करने की उम्मीद कर रहा है.
उन्होंने कहा कि आगामी चीन-रूस बैठक में दोनों पक्ष चीन और अमेरिका के नेताओं के बीच हालिया बातचीत पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे.
पेस्कोव ने कहा, “दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के शीर्ष नेताओं के बीच सीधा संवाद स्वाभाविक रूप से रूस समेत सभी देशों का ध्यान आकर्षित करेगा.”
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