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तकनीक की चकाचौंध में न छूटे सामाजिक न्याय, CJI सूर्यकांत ने दिनकर स्मृति व्याख्यान में कही बड़ी बात

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May 7, 2026


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नई दिल्ली में आयोजित 8वें ‘दिनकर स्मृति व्याख्यान’ के दौरान प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) सूर्यकांत ने आधुनिक युग की चुनौतियों और सामाजिक समानता पर अपने विचार साझा करते हुए इस बात पर जोर दिया कि सामाजिक न्याय एक मानवीय और न्यायसंगत समाज की आधारशिला है।

जस्टिस सूर्यकांत ने आगाह किया कि जहां एक ओर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर यह तकनीक वंचितों के प्रति भेदभावपूर्ण और पक्षपाती रवैया भी दिखा रही है।

तकनीक पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी रिपोर्ट आ रही हैं जो एआइ के एल्गोरिदम में छिपे पूर्वाग्रहों की ओर इशारा करती हैं, जो अक्सर समाज के वंचित वर्ग के खिलाफ होते हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक की इस चकाचौंध में सामाजिक न्याय पीछे नहीं छूटना चाहिए।

दिनकर स्मृति व्याख्यान में बोले CJI

राष्ट्रकवि दिनकर के काव्यों में सामाजिक न्याय सीजेआइ ने रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी कृति ‘रश्मिरथी’ का उल्लेख करते हुए कहा कि समानता और मानवीय गरिमा के जो आदर्श हमारे संविधान में बाद में शामिल किए गए, वे दिनकर जी की कविताओं में बहुत पहले से ही गूंज रहे थे।

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जिस प्रकार स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महान लेखकों – प्रेमचंद, निराला, बच्चन और महादेवी वर्मा की रचनाओं ने समाज को मरहम लगाने और क्रांति की अलख जगाने का काम किया, ठीक उसी प्रकार कानून को भी पीड़ित मानवता को सुकून पहुंचाने वाला होना चाहिए।

गांधी जी ने दिनकर को ‘राष्ट्रकवि’ इसीलिए कहा क्योंकि उनके लेखन में राष्ट्र की आत्मा, उसकी पीड़ा और संघर्ष का प्रतिबिंब था। कानून और तकनीक की कसौटी पर समानता सीजेआइ ने स्पष्ट किया कि केवल कानून बना देना पर्याप्त नहीं है; लोकतंत्र की सफलता इस बात में है कि हर व्यक्ति को सम्मान और गरिमा मिले।

जस्टिस सूर्यकांत ने चिंता व्यक्त की कि ‘रश्मिरथी’ लिखे जाने के सात दशक बाद भी समाज में असमानता कायम है। उन्होंने कहा, ‘न्याय, आत्म-सम्मान और मानवीय गरिमा को समाज के केंद्र में होना चाहिए। सामाजिक न्याय ही एक मानवीय और न्यायसंगत समाज की आधारशिला है।’

जस्टिस सूर्यकांत ने इस बात पर जोर दिया कि ‘पोएटिक जस्टिस’ (काव्यात्मक न्याय) की अवधारणा भी साहित्य से ही आई है, जो कानून को संवेदनशीलता प्रदान करती है। एनजीओ ‘रिस्पेक्ट इंडिया’ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास ¨सह और सांसद मनोज तिवारी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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