डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 2012 के तेलंगाना अपहरण और हत्या के एक चर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेश को पलट दिया है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और के विनोद चंद्रन की पीठ ने सबूतों के विश्लेषण पर सवाल उठाते हुए आरोपी की सजा और दोषसिद्धि को रद कर दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पीड़ित का शव फ्रिज से बरामद होने और पोस्टमार्टम में गला घोंटने की पुष्टि के बावजूद, आरोपी को सीधे इस अपराध या फ्लैट से जोड़ने वाला कोई ठोस और विश्वसनीय सबूत मौजूद नहीं है।
धनंजय महापात्रा की रिपोर्ट के अनुसार, एक हफ्ते में तीसरी बार निचली अदालत का फैसला पलटते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दोषी ठहराए गए आरोपी को रिहा करने का आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, साल 2012 में तेलंगाना में एक व्यक्ति का किडनैप किया गया था। किडनैपर्स ने 23 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी, जिसमें से पीड़ित के पिता ने 1.5 लाख रुपये दिए भी थे। इसके बावजूद पीड़ित की हत्या कर दी गई।
आरोपियों की निशानदेही पर एक फ्लैट में रखे रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) से उसका शव बरामद हुआ। ट्रायल कोर्ट ने पांच आरोपियों को दोषी ठहराया था, जबकि तेलंगाना हाईकोर्ट ने चार को बरी कर दिया और एक की सजा बरकरार रखी थी।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने पाया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटकर हत्या किए जाने और शव फ्रिज में मिलने की पुष्टि तो होती है, लेकिन आरोपियों को इस अपराध या उस फ्लैट से जोड़ने वाला कोई ठोस और विश्वसनीय सबूत मौजूद नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ शव की बरामदगी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर किसी को हत्या का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। ठोस सबूत न होने के चलते सुप्रीम कोर्ट ने पांचवे आरोपी को तुरंत रिहा करने का आदेश जारी कर दिया।