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दिल्ली में यमुना किनारे क्यों चले बुलडोज़र, क्या आगे और भी इलाक़े आएंगे ज़द में?: ग्राउंड रिपोर्ट

Byadmin

Jul 10, 2026


बुलडोज़र

इमेज स्रोत, Prabhat Kumar/BBC

इमेज कैप्शन, दिल्ली में बीते कुछ हफ़्तों में यमुना किनारे बसे इलाक़ों में बुलडोज़र कार्रवाई हुई है

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  • पढ़ने का समय: 14 मिनट

25 जून की सुबह जैसे ही दिन निकला, यमुना के निगमबोध घाट के क़रीब घाटों से सटी बस्ती को सुरक्षा बलों ने घेर लिया. नाकेबंदी के बीच बुलडोज़र अंदर दाख़िल हुए और शाम तक जहां क़रीब एक हज़ार लोग रहते थे, वहां सिर्फ़ मलबे के ढेर बचे थे.

यमुना किनारे उस दिन सिर्फ़ मकान नहीं ढह रहे थे. बुलडोज़र की हर चोट के साथ किसी का घर टूट रहा था, किसी की जमा-पूंजी मलबे में बदल रही थी और किसी के सामने यह सवाल खड़ा था कि अब आगे जाएं तो कहां?

फ़तेहचंद भी उन्हीं लोगों में से एक हैं. उनका कहना है कि उनका परिवार यहां 1954 से रह रहा है. बुलडोज़रों के शोर के बीच उनका परिवार घर से जो कुछ बचा सकता था, उसे समेटने में लगा था.

अब उन्हें अपने परिवार के साथ किराए के मकान में नई ज़िंदगी शुरू करनी होगी. ऐसे हालात से गुज़र रहे वो अकेले नहीं थे, लगभग हर दूसरे व्यक्ति की यही कहानी थी.

शाम होते-होते जब बुलडोज़र पीछे मलबे के ढेर छोड़ते हुए बस्ती के आख़िरी छोर तक पहुंच गए, तो सड़क किनारे सिर्फ़ सामान ही नहीं बल्कि बेघर हुए लोग भी थे.

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