डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज बुधवार, 8 जुलाई को गगनयान क्रू मॉड्यूल के लिए मुख्य पैराशूट सिस्टम का सफल परीक्षण कर लिया है।
मध्य प्रदेश के श्योपुर में एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ADRDE) ड्रॉप जोन में यह परीक्षण किया गया। इस सफल परीक्षण के साथ भारत ने पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है।
ISRO ने गगनयान क्रू मॉड्यूल का किया सफल परीक्षण
ISRO ने मिशन के सफल परीक्षण के बाद बयान जारी करते हुए कहा, ‘इस परीक्षण का मकसद पहले बिना क्रू वाले गगनयान G1 मिशन के दौरान ज्यादा से ज्यादा संभावित लोड की स्थिति में मुख्य पैराशूट की मजबूती और डिजाइन मार्जिन को परखना था।’
परीक्षण के दौरान, भारतीय वायु सेना के IL-76 विमान से 2.5 किलोमीटर की ऊंचाई से एक नकली असेंबली को गिराया गया, जिसमें एक मुख्य पैराशूट और एक डमी पेलोड शामिल था।
इसे गिराने के बाद, असेंबली को स्थिर करने और नीचे आने की गति को काफी कम करने के लिए एक ‘ड्रोग’ पैराशूट खोला गया। इसके बाद मुख्य पैराशूट खोला गया, जिससे पेलोड सुरक्षित गति (टर्मिनल वेलोसिटी) के साथ नीचे उतरा।
Yesterday, ISRO conducted the 5th Integrated Main Parahute Air-drop Test (IMAT-05) to test Gaganyaan’s deceleration system! 🪂
In this test, a mass simulator fitted with Gaganyaan’s decelebration (recovery) system was dropped from an IAF IL-76 aircraft from 2.5 km altitude at… pic.twitter.com/b7kgpxu1Oe
— ISRO Spaceflight (@ISROSpaceflight) July 8, 2026
पैराशूट सिस्टम की हुई चेकिंग
ISRO ने बताया, IMAT-05 के सफल समापन से पहले बिना क्रू वाले गगनयान मिशन (G1) के लिए मुख्य पैराशूट सिस्टम के प्रदर्शन और उसके सही काम करने से भरोसा मिलता है।’
इसरो ने आगे बताया, ‘यह गगनयान मिशन के लिए अहम मुख्य पैराशूट को परखने के लिए इंटीग्रेटेड मेन पैराशूट एयरड्रॉप टेस्ट (IMAT) की सीरीज का पांचवां परीक्षण है।’
गगनयान क्रू मॉड्यूल में पैराशूट सिस्टम लगा है जिसमें चार अलग-अलग तरह के 10 पैराशूट हैं। हर पैराशूट को मॉड्यूल के नीचे उतरने के दौरान एक खास काम करने के लिए डिजाइन किया गया है।
गगनयान क्रू मॉड्यूल में पैराशूट सिस्टम में दो ‘एपेक्स कवर सेपरेशन’ पैराशूट शामिल हैं। ये पैराशूट सुरक्षात्मक एपेक्स कवर को अलग करते हैं जो पैराशूट कंपार्टमेंट को वायुमंडल में दोबारा प्रवेश के दौरान पैदा होने वाली तेज गर्मी से बचाता है।
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इस पैराशूट सिस्टम में नीचे उतरते मॉड्यूल को स्थिर करने और उसकी स्पीड को कम करने के लिए दो ‘ड्रोग’ पैराशूट भी हैं। साथ ही, तीन ‘पायलट’ पैराशूट हैं जो नीचे उतरने के आखिरी चरण के लिए तीन मुख्य पैराशूट को अलग से बाहर निकालते और खोलते हैं।