जयपुर के मानसरोवर स्थित नीरजा मोदी स्कूल में चौथी कक्षा की छात्रा अमायरा की मौत के करीब आठ महीने बाद एक नया सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। इस वीडियो के सामने आने के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मृतक छात्रा के परिजनों का दावा है कि करीब आठ मिनट के फुटेज में अमायरा कई बार अपनी क्लास टीचर से बात करने और मदद मांगने की कोशिश करती नजर आती है। वहीं, पुलिस का कहना है कि चार्जशीट जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही दाखिल की गई है।
परिजनों का दावा- वीडियो में बच्ची दिख रही है परेशान
अमायरा के परिवार के अनुसार, वीडियो की शुरुआत में वह सामान्य रूप से अपनी कक्षा में प्रवेश करती दिखाई देती है। इसके बाद अन्य छात्र भी कक्षा में पहुंचते हैं। कुछ देर बाद वह अपनी एक सहेली के साथ डांस क्लास में जाती है और सामान्य गतिविधियों में हिस्सा लेती है।
परिजनों का कहना है कि डांस क्लास से लौटने के बाद कक्षा का माहौल बदलता नजर आता है। उनका आरोप है कि कुछ छात्र डिजिटल स्लेट पर कुछ लिखकर अमायरा को दिखाते हैं, जबकि स्कूल में ऐसी स्लेट लाने की अनुमति नहीं थी। परिवार का दावा है कि इसके बाद बच्ची असहज और मानसिक रूप से परेशान दिखाई देती है।
‘कई बार शिक्षिका के पास गई, लेकिन बात नहीं सुनी गई’
परिजनों के मुताबिक, वीडियो में अमायरा कई बार अपनी सीट से उठकर क्लास टीचर के पास जाती है और उनसे बातचीत करती हुई दिखाई देती है। इसी दौरान एक अन्य छात्र भी शिक्षिका से अमायरा की ओर इशारा करते हुए कुछ कहता है। परिवार का आरोप है कि इसके बावजूद बच्ची की बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। वीडियो में वह दोबारा शिक्षिका के पास जाती है, लेकिन उसे वापस सीट पर भेज दिया जाता है। कुछ देर बाद वह फिर शिक्षिका से बात करने पहुंचती है और उसके बाद कक्षा से बाहर निकल जाती है।
सीसीटीवी में दिखा क्लास से बाहर निकलने का घटनाक्रम
परिजनों के अनुसार, फुटेज में अमायरा कक्षा से निकलकर कॉरिडोर के रास्ते तेजी से सीढ़ियों की ओर जाती दिखाई देती है। इसके बाद वह चौथी मंजिल तक पहुंचती है, जहां बाद में वह दर्दनाक घटना हुई, जिसमें उसकी मौत हो गई।
ये भी पढ़ें:नीरजा मोदी स्कूल मामले में 8 महीने बाद चार्जशीट दाखिल, दोषियों की गिरफ्तारी की मांग तेज
चार्जशीट पर उठाए सवाल
अमायरा के पिता विजय मीणा और मां शिवानी ने पुलिस की चार्जशीट पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जांच अधूरी रही और आत्महत्या के लिए उकसाने जैसी गंभीर धाराएं शामिल नहीं की गईं। परिजनों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी केवल लापरवाही और सबूत छिपाने जैसे आरोपों तक सीमित कर दी गई, जबकि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए थी।
पुलिस का पक्ष
डीसीपी साउथ राजर्षि राज ने कहा कि चार्जशीट जांच के दौरान मिले तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तैयार की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत में वही आरोप प्रस्तुत किए गए हैं, जो जांच में स्थापित हुए। अब मामले में अंतिम फैसला न्यायालय उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर करेगा।
हाईकोर्ट जाने की तैयारी
परिजनों ने कहा है कि वे अदालत में पुलिस की चार्जशीट का विरोध करेंगे और आत्महत्या के लिए उकसाने समेत अन्य गंभीर धाराएं जोड़ने की मांग करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा। राजस्थान अभिभावक संघ ने भी परिवार का समर्थन करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।