दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि अगर कोई महिला सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम देने की साझा मंशा रखती है या इसमें सहयोग करती है, तो उस पर भी सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया जा सकता है। इसके लिए यह जरूरी नहीं है कि उसने खुद दुष्कर्म किया हो या वह वारदात को अंजाम देने वाले लोगों के समूह में शामिल रही हो। न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने स्पष्ट किया कि कानून में इस्तेमाल किए गए शब्द व्यक्ति का मतलब केवल पुरुषों से नहीं है। अदालत ने कहा कि अगर कोई महिला दुष्कर्म कराने की साझा मंशा से काम करती है, तो उसे भी सामूहिक दुष्कर्म मामले में जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।