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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय तक प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया है.
हालांकि अभी उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्तीफ़ा सौंपा है और इसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के स्वीकार करने के बाद स्वीकृत माना जाएगा.
सीजेपी के मंच से पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इस्तीफ़े की मांग को लेकर 26 दिनों तक भूख हड़ताल किया.
वहीं इस प्रदर्शन में शुरुआत से छात्र संगठन जुड़े हुए हैं. वो भले मंच पर अनशन पर नहीं बैठे लेकिन मंच के किनारे अनशन पर बैठे रहे. ऑल इंडिया स्टूडेंट असोसिएशन यानी आइसा जो सीपीआई (एमएल) की छात्र शाखा है, इसके तीन छात्रों ने 23 दिनों तक अनशन किया.
इस्तीफ़े के फ़ैसले के बाद जंतर-मंतर पर मंच से सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि “हमने कर दिखाया. धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया है.”
उन्होंने कहा, “धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा तो हो गया और ये इस्तीफ़ा इस बात का गवाह है कि अगर आप लोग डरेंगे नहीं और सरकार के सामने झुकेंगे नहीं तो अच्छे अच्छों के हम इस्तीफ़े ले सकते हैं.”
अभिजीत दीपके ने क्या कहा?
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जंतर मंतर के मंच से बोलते हुए सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा, “डरना नहीं है क्योंकि लोकतंत्र है. अगर लोकतंत्र में बोलने से डर लगने लगे तो कैसा लोकतंत्र है. अगर आवाज़ उठाएंगे तो ये लोग लाइन में रहेंगे और इन्हें लाइन में रखना ज़रूरी है. ये जो ख़ुद को बादशाह समझ बैठे हैं वो हमारी वजह से बैठे हैं.”
सीजेपी की पहली मांग धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा हो चुका है लेकिन सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि उनकी दो मांगें और हैं. उन्होंने कहा कि जब तक ये दो मांगें भी पूरी नहीं हो जातीं तब तक वो जंतर मंतर से नहीं हटेंगे.
उन्होंने कहा, “इस्तीफ़ा हो गया है लेकिन हमारे दो और मांगें है. हम कॉकरोच हैं और ऐसे ही नहीं जाएंगे क्योंकि एक बार कॉकरोच घुसता है तो निकलता नहीं है. धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा हो चुका है लेकिन जिनके बच्चों ने नीट पेपर लीक की वजह से आत्महत्या की है, उन परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवज़ा मिलना चाहिए.”
तीसरी मांग को लेकर उन्होंने कहा, “20 जुलाई को जिन पुलिस वालों ने हरक़त की थी, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए. डीसीपी संदीप लांबा, एसीपी अजय शर्मा, सचिन शर्मा.. इन्होंने अमित शाह और मोदी के नाम पर लाठियां चलाई हैं. अभी एक इस्तीफ़ा हुआ है और याद रखना कॉकरोच से पंगा नहीं लेना है. 20 जुलाई के बाद से स्टूडेंट्स पर जितने भी केस हुए हैं उन्हें वापस लिया जाना चाहिए. यही लोकतंत्र है.”
सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा है कि ये देश के आम आदमी की जीत है, जिन लोगों ने इस देश में लोकतंत्र ख़त्म कर दिया था और सवाल पूछने को गुनाह मान लिया था, हमने उन लोगों से अपना देश वापस ले लिया है. अभी सिर्फ़ शुरुआत हुई है हम अपने पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था को बदलेंगे.”
“हमारी तीनों मांगें लिखित में मान ली जाएं तो हम घर चले जाएंगे. हमने देशभर में शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकालने की घोषणा की है, शाम को 6 बजे पूरे देश में हर कोई कैंडल मार्च निकाले.”
सीजेपी ने देशभर में हर ज़िले में रविवार शाम 6 बजे कैंडल मार्च निकालने की घोषणा की है.
सोनम वांगचुक ने क्या कहा?
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सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े को लोकतंत्र की जीत बताया है.
उन्होंने एक्स पर लिखा, “यह लोकतंत्र की जीत है, लोकतंत्र की जीत, जो सीधे सड़कों से आई है. यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है. कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और देश की ‘जेन ज़ी’ को बधाई.”
उन्होंने लिखा, “साथ ही, उन सभी नागरिकों का भी धन्यवाद जिन्होंने डर और डर के डर को त्यागकर देश के हर कोने से आवाज़ उठाई.”
उन्होंने आखिर में लिखा, “जवाबदेही से अब सुधार की ओर.”
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने नीट पेपर लीक मुद्दे को लेकर 26 दिनों तक अनशन किया. 28 जून को उन्होंने जंतर-मंतर पर सीजेपी के मंच से अनशन शुरू किया था.
गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने उनका अनशन तुड़वाया.
नेताओं ने क्या कहा?
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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा है, “धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा हमारे एजुकेशन सिस्टम को फिर से संवारने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है. शाबाश देश भर के छात्रों, आप सभी पर गर्व है. सड़कों पर आकर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डटकर खड़े होने वाले हर एक युवा, हर छात्र को बहुत-बहुत बधाई.”
“दो मांगें अभी भी बाकी हैं – प्रधानमंत्री छात्रों और भारत के भविष्य को सम्मान देते हुए माफ़ी मांगें और छात्रों पर हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई हो. अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने में ही असली साहस है. इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है. डरो मत.”
वहीं बीजेपी नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है जिसमें धर्मेंद्र प्रधान के काम की तारीफ़ें की गई हैं.
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने एक्स पर लिखा, “केंद्रीय शिक्षा मंत्री के तौर पर, धर्मेंद्र प्रधान ने भारत के शिक्षा के माहौल को सुधारने और ऐतिहासिक नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी 2020) को सफलतापूर्वक लागू करने में अहम भूमिका निभाई.”
“बड़े हितों को प्राथमिकता देते हुए, पद छोड़ने का उनका फ़ैसला सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा के सबसे ऊंचे स्टैंडर्ड को दिखाता है. पार्टी इस फ़ैसले में धर्मेंद्र प्रधान के साथ पूरी तरह खड़ी है. मैं उनके आगे के कामों के लिए शुभकामनाएं देता हूं.”
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर लिखा है कि ये करोड़ों युवाओं की जीत है.
उन्होंने लिखा, “भारत के ‘छात्रों की गूँज’ आख़िरकार अहंकारी सत्ता की दहलीज़ तक पहुँच गई. ये हमारे करोड़ों युवाओं की जीत है जिन्होंने देशभर में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सड़क पर आवाज़ उठाई. ये सत्य की जीत है और मोदीजी के हठ की हार है. ये उन सभी परिवारों की जीत है जिन्होंने अपने ख़ून, अपने बच्चों को खोया, क्योंकि यह सरकार भ्रष्टाचारी है. ये साझा विपक्ष की जीत है, जिन्होंने छात्रों के हित में संसद से सड़क तक आवाज़ उठाई.”
“अब बारी है मोदी जी को हमारी युवा पीढ़ी से माफ़ी माँगने की और जिन्होंने उन पर लाठी-डंडे-पेलेट गन चलवाई है, उनपर कठोर कार्यवाही करने की.”
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड में कहा, “ये वो दिन है जब हमारे देश के युवा और स्टूडेंट्स वापस अपने देश को अपने हाथों में लेना शुरू कर रहे हैं. उन्होंने साबित किया है कि जब भी आप अहिंसक तरीक़े से हिम्मत के साथ खड़े होते हैं तो चाहे सामने कोई भी हो आप जीतते हैं.”
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि ये नई पीढ़ी की जीत है और सरकार को इस बात को समझ लेना चाहिए कि प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक गंभीरता से सोचना होगा.
आम आदमी पार्टी नेता मनीष सिसोदिया ने कहा है कि “धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा भेजा नहीं है बल्कि देश के बच्चों और छात्रों ने इस्तीफ़ा ले लिया है. इसे मोदी जी की ओर से इस्तीफ़ा लेना तब कहा जाता जब नीट पेपर घोटाला हुआ था और 22 बच्चों ने आत्महत्या की थी, तब मोदी जी ज़िम्मेदार प्रधानमंत्री होने के नाते इस्तीफ़ा ले लेते.”
“जेन ज़ी ने अहंकारी प्रधानमंत्री को मजबूर किया है कि वो अपने भ्रष्टाचारी शिक्षा मंत्री को उसके पद से हटाएं.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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