जेएनएन, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति आयोग के अधिकार क्षेत्र को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने नई व्यवस्था दी है।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आयोग शिकायत की जांच कर सकता है और तथ्यों के आधार पर सरकार या संबंधित प्राधिकरण को कार्रवाई की अनुशंसा कर सकता है, लेकिन किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध सिद्ध होने का निष्कर्ष नहीं दे सकता। यह अधिकार आपराधिक न्यायालय का है।
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने कोरबा के सहायक प्रोफेसर मृगेश कुमार यादव के विरुद्ध राज्य अनुसूचित जाति आयोग की एफआइआर दर्ज कराने की अनुशंसा को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार कर ली।
प्रकरण के अनुसार, मृगेश कुमार यादव कोरबा में शासकीय महाविद्यालय बरपाली में सहायक प्रोफेसर हैं। परीक्षा के दौरान उन्होंने और एक अन्य शिक्षिका ने छात्रा दीपमाला गुलरी को कथित रूप से नकल करते पकड़ा था।
इसके बाद दीपमाला ने यादव के विरुद्ध राज्य अनुसूचित जाति आयोग में शिकायत की। आरोप लगाया गया कि नकल के मामले को लेकर वे उसे दबाव में ले रहे थे और परेशान कर रहे थे।
आयोग ने 21 जनवरी 2020 को यादव को नोटिस जारी कर उत्तर मांगा। उन्होंने तीन फरवरी को दस्तावेज सहित अपना उत्तर प्रस्तुत किया और बताया कि इसी तरह के आरोपों की पहले भी जांच हो चुकी है तथा ये आरोप झूठे पाए गए थे।
इस बीच 16 मार्च 2021 को आयोग ने यादव के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने की अनुशंसा कर दी।
आयोग ने एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(1) के तहत लगाए गए आरोप को प्रमाणित मानते हुए एफआइआर दर्ज करने की अनुशंसा की थी। सुनवाई के पश्चात हाई कोर्ट ने आयोग की 16 मार्च 2021 की अनुशंसा को निरस्त कर दिया।