डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कड़ी मेहनत, अटूट लगन बुलंद हौसलों की मिसाल पेश करने वाली आईपीएस प्रीति यादव इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नर द्वारा किए गए प्रशासनिक फेरबदल के तहत उन्हें नोएडा जोन-1 की पुलिस उपायुक्त (DCP) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस नियुक्ति के साथ ही वह नोएडा जोन की कमान संभालने वाली महिला डीसीपी बन गई हैं।

बचपन से पढ़ाई में थी तेज
हरियाणा के रेवाड़ी जिले में जन्मीं प्रीति यादव बचपन से ही पढ़ाई में बेहद मेधावी थीं। उन्होंने अपनी 12वीं की परीक्षा ह्यूमैनिटीज विषय से 96.2% अंकों के साथ उत्तीर्ण की और इसके बाद जियोग्राफी से बीए ऑनर्स की डिग्री लेते हुए यूनिवर्सिटी में गोल्ड मेडल हासिल किया।

ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का मन बना लिया था। अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ने और पूरा ध्यान केंद्रित करने के लिए उन्होंने मास्टर्स की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और यूपीएससी की तैयारी में जुट गईं।

पिता थे कॉन्स्टेबल, बेटी बनी आईपीएस
संसद टीवी को दिए एक इंटरव्यू में प्रीति यादव ने अपने सफर और प्रेरणा के बारे में खुलकर बात करते हुए कहा था, बचपन में मेरी इच्छा सिविल सेवा में जाने की थी। मैंने अपने पिता को देखा, जिन्होंने कॉन्स्टेबल के तौर पर अपनी नौकरी शुरू की थी। उस समय वे ASI के पद पर थे। उनसे मुझे बहुत प्रेरणा मिली कि जीवन में कुछ अच्छा करना चाहिए। और अगर कुछ अच्छा करना है, तो क्यों न सबसे ऊंचे पद से शुरुआत की जाए?

मुझे यह मौका मिला। मुझे बहुत अच्छे शिक्षक मिले। मेरे माता-पिता का इतना अच्छा सहयोग रहा कि मैंने इस मौके को तुरंत लपक लिया। पहले ही प्रयास में मेरा प्रीलिम्स क्लियर हो गया। प्रीलिम्स क्लियर हुआ, फिर मेन्स भी क्लियर हो गया। इंटरव्यू के बाद, मेरी मुख्य परीक्षा में 21 अंक आए।

वर्ष 2019 में महज 22 वर्ष की कम उम्र में प्रीति ने यूपीएससी परीक्षा पास कर उत्तर प्रदेश कैडर की आईपीएस अधिकारी बनने का गौरव हासिल किया।
नोएडा जोन-1 की मिली कमान
आईपीएस बनने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग बतौर एएसपी सहारनपुर जिले में हुई थी, जहां उन्होंने प्रशासनिक बारीकियों को समझा। अब उन्हें नोएडा जोन-1 जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र की कमान मिली है। उनसे पहले इस पद पर अपनी सेवाएं दे रहे आईपीएस साद मियां खान को गौतमबुद्ध नगर से कार्यमुक्त कर दिया गया है, जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान जिले के तीनों जोनों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली थीं।