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परिसीमन विधेयक को समर्थन देने के लिए डीएमके ने केंद्र सरकार के सामने अपनी शर्त रखी है. ये शर्तें ऐसे समय में सामने आई हैं, जब केंद्र सरकार विधेयक के लिए जरूरी समर्थन जुटाने के मकसद से विपक्षी दलों से संपर्क बढ़ा रही है.
हालाँकि अंग्रेज़ी अख़बार ‘द हिन्दू’ के मुताबिक़ डीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि केंद्र सरकार ने अब तक उनसे संपर्क नहीं किया है.
दरअसल केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार नए परिसीमन की प्रक्रिया लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक लाने की संभावना पर विचार कर रही है.
ऐसे में डीएमके ने संकेत दिए हैं कि अगर सरकार अप्रैल में लोकसभा में पेश किए गए विधेयक में तीन अहम बदलाव करती है, तो पार्टी इस विधेयक का समर्थन करने पर विचार कर सकती है.
अप्रैल में लाया गया यह विधेयक पारित नहीं हो सका था. दरअसल दक्षिण भारतीय राज्यों को आशंका है कि मौजूदा स्वरूप में परिसीमन लागू हो जाता है तो केंद्र सरकार के गठन में उसकी अहमियत कम हो जाएगी.
फ़िलहाल साल 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा में सीटों की संख्या निर्धारित है और यह सीमा साल 2027 की जनगणना के बाद समाप्त हो जाएगी.
डीएमके की मांग है कि लोकसभा में सीटों की यह संख्या अगले 25 साल तक न बदली जाए.
द हिन्दू के मुताबिक़ साथ ही डीएमके चाहती है कि संविधान में संशोधन करके सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों में 50% की एकसमान बढ़ोतरी की जाए.
इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह ने अप्रैल में संसद में परिसीमन से जुड़ा बिल पेश करते समय मौखिक रूप से ऐसा करने का वादा किया था.
द हिन्दू ने लिखा है कि ‘डीएमके सूत्रों के मुताबिक, पार्टी चाहती है कि इस बिल में हर राज्य के लिए सीटों की संख्या की एक सूची भी शामिल हो’.
डीएमके का कहना है कि वह बिल का स्वरूप और उसमें शामिल बातों की जानकारी मिलने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लेगी.