इमेज कैप्शन, कलिता माझी (बाएं), रूपा गांगुली (बीच में) और रत्ना देबनाथ (दाएं) ने विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की है
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पांच विधानसभाओं के चुनाव परिणाम आ गए हैं लेकिन जिन दो राज्यों पर संभवतः सबकी नज़र थी वे थे पश्चिम बंगाल और असम.
बीजेपी ने इन दोनों ही राज्यों में भारी जीत हासिल की है. पश्चिम बंगाल में तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी भवानीपुर सीट से चुनाव हार गई हैं.
चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले लोकसभा में 131वां संविधान संशोधन बिल वोटिंग के बाद गिर गया था. यह विधेयक महिला आरक्षण क़ानून में संशोधन के लिए लाया गया था.
लेकिन डीलिमिटेशन और संसद की सीटें बढ़ाए जाने को इस संशोधन में जोड़ने की वजह से विपक्ष ने विरोध किया और यह संशोधन विधेयक पास नहीं हो पाया.
इसके बाद चुनाव प्रचार में, ख़ासकर पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने ख़ुद को महिला समर्थक और विरोधी पार्टियों को महिला विरोधी बताते हुए प्रचार किया था.
टीएमसी समेत अन्य दलों ने बीजेपी पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया था. कहा जा सकता है कि इस तरह महिला-कल्याण चुनाव प्रचार के मुख्य मुद्दों में से एक था.
विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे
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विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे
कितनी महिला उम्मीदवार
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इमेज कैप्शन, पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान प्रचार करतीं सीपीएम की प्रत्याशी अवा मंडल
एनडीटीवी इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव 2026 में केवल 385 महिला उम्मीदवार (13%) चुनावी मैदान में थीं. 2021 के चुनाव में 2130 उम्मीदवारों में से 240 महिलाएं (11%) थीं.
द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक़, असम में इन चुनावों में कुल उम्मीदवारों में महिलाओं की संख्या सिर्फ़ 8.17 प्रतिशत है. 2021 के असम विधानसभा चुनाव में 74 महिला उम्मीदवार मैदान में थीं, लेकिन इस बार यह संख्या घटकर 59 रह गई है.
असम के 35 में से 16 ज़िलों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से ज़्यादा है, लेकिन चुनाव में सिर्फ़ 59 महिला प्रत्याशी मैदान में थीं.
हम आपको संक्षेप में पश्चिम बंगाल और असम में चुनाव जीतने वालीं उल्लेखनीय मुख्य महिला उम्मीदवारों के बारे में बता रहे हैं.
पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल चुनावों में जीत का परचम लहराने वाली महिलाओं में सबसे पहले नाम पानीहाटी विधानसभा सेबीजेपी की उम्मीदवार रत्ना देबनाथ का, जिन्होंने 28836 वोटों से जीत हासिल की है. उन्हें 87977 वोट मिले और उन्होंने टीएमसी के तीर्थशंकर घोष को हराया.
रत्ना देबनाथ आरजी कर रेप-मर्डर की घटना में मारी गईं महिला डॉक्टर की मां हैं, बीजेपी ने उन्हें पानीहाटी सीट से उम्मीदवार बनाया था. उन्होंने अपने चुनाव अभियान के केंद्र में न्याय और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों को रखा था.
बैरकपुर के पास उत्तर 24 परगना के शहरी औद्योगिक क्षेत्र में स्थित पानीहाटी, वर्ष 2011 से तृणमूल कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा था.
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इमेज कैप्शन, कलिता माझी ने दो दशक तक घरेलू सहायिका के रूप में काम किया है
इसके बाद बात कलिता माझी की. कलिता माजी ऑसग्राम (एससी) सीट से चुनाव जीती हैं. वह राजनीति में आने से पहले पिछले दो दशकों से घरेलू सहायिका के रूप में काम कर रही थीं. वह घरों में साफ़-सफ़ाई करके महीने का करीब 2,500 रुपये कमाती थीं.
ऑसग्राम सीट पर उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के श्यामा प्रसन्ना लोहार को 12535 वोट से हराया. घर-घर जाकर चुनाव प्रचार करने वालीं कलिता माझी को कुल 107692 वोट मिले हैं. बीजेपी ने उन्हें पिछले विधानसभा चुनाव में भी टिकट दिया था. तब उन्हें लगभग 41% वोट मिले थे, हालांकि वह 12000 वोटों के अंतर से हार गई थीं.
अब श्यामपुकुर विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी की पूर्णिमा चक्रबर्तीकी बात, जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस की शशि पांजा को 14633 वोटों से हराया है.
पूर्णिमा चक्रबर्ती को 60248 वोट मिले हैं और शशि पांजा को 45615 वोट. तीसरे स्थान पर ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक की झुमा दास रही हैं जिन्हें 7356 वोट मिले हैं.
पूर्णिमा चक्रबर्ती की जीत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि टीएमसी की मंत्री शशि पांजा मुखर नेताओं में से एक हैं. वह तीन बार श्यामपुकुर से विधायक रह चुकी हैं.
पांजा उन लगभग 60 लाख लोगों में शामिल थीं, जिनके नाम पश्चिम बंगाल में निर्वाचन आयोग द्वारा किए गए एसआईआर के दौरान मतदाता सूची की एडजुडिकेशन सूची में डाले गए थे. उनका नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल किया गया और वह चुनाव मैदान में उतरीं.
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इमेज कैप्शन, श्यामपुकुर से टीएमसी उम्मीदवार शशि पांजा चुनाव हार गई हैं
अब बात सुजापुर विधानसभा सीट की, जहां से तृणमूल कांग्रेस की सबीना यास्मीन ने 60287 वोट से बड़ी जीत हासिल की है. उन्हें 112795 वोट मिले जबकि दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस उम्मीदवार अब्दुल हन्नान को 52508 वोटों से ही संतोष करना पड़ा.
यहां बीजेपी के प्रत्याशी अभिजीत रजक चौथे स्थान पर खिसक गए. उन्हें सिर्फ़ 20066 वोट मिले.
90 के दशक में दूरदर्शन पर आने वाले लोकप्रिय धारावाहिक महाभारत में द्रौपदी की भूमिका निभाने के कारण रूपा गांगुली को देश भर में पहचान मिली थी. इसके अलावा वह बंगाली फ़िल्मों में अभिनेत्री के रूप में काम करती रहीं.
2015 से वह बीजेपी के साथ जुड़ी हैं और 2016 का विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. उसी साल राष्ट्रपति ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था.
इसके अलावा रेखा पात्रा का ज़िक्र भी ज़रूरी है जिन्होंने हिंगलगंज सीट से जीत हासिल की है. बीजेपी ने उन्हें लोकसभा चुनाव में टिकट दिया था लेकिन उसमें वह जीत नहीं पाई थीं. अब विधानसभा चुनाव में उन्होंने टीएमसी उम्मीदवार को 5000 वोट से हराया है.
असम
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इमेज कैप्शन, गुवाहाटी के बीजेपी कार्यालय में असम में बीजेपी की जीत का जश्न मनातीं पार्टी कार्यकर्ता
पांच बार विधायक रह चुकीं अंजना नियोग 2021 में चुनाव जीतने के बाद हिमंत बिस्वा सरकार में वित्त मंत्री बनी थीं.
दीप्तिमय चौधरी दूसरी बार विधायक बनी हैं. 2024 में उनके पति फणी भूषण चौधरी के बारपेटा लोकसभा सीट से निर्वाचित होने के बाद बोंगाईगांव सीट खाली हुई थी तो दीप्तिमय चौधरी उपचुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में पहुंची थीं.
बीजेपी ने उन्हें फिर विधानसभा चुनावों में टिकट दिया और उन्होंने इस बार भी जीत हासिल की.
धुबरी सीट से कांग्रेस की बेबी बेगम ने 68661 वोट से भारी जीत हासिल की. 118362 वोट हासिल कर उन्होंने एआईयूडीएफ़ के नज़रुल हक़ को पछाड़ा, जिन्हें 49701 वोट मिले. बीजेपी के उत्तम प्रसाद 49654 वोट हासिल कर यहां तीसरे नंबर पर खिसक गए.
धुबरी कांग्रेस का गढ़ माना जाता है. यहां से पार्टी ने नौ बार जीत हासिल की है. यह मुख्य रूप से एक ग्रामीण सीट है, जहां 74.03 प्रतिशत वोटर गांवों में रहते हैं. यहां मतदाताओं में बड़ी संख्या में मुस्लिमों की है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.