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पासपोर्ट बनवाना हुआ महंगा, 14 साल बाद फीस में 67 फीसदी की भारी बढ़ोतरी

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Aug 1, 2026


पीटीआई, नई दिल्ली। सरकार ने शुक्रवार को लोकसभा को बताया गया कि पासपोर्ट फीस में हाल ही में हुई 67 प्रतिशत की बढ़ोतरी 14 साल बाद की गई है।

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा, 2012 में पिछली बार पासपोर्ट फीस में बदलाव किया गया था। इसके बाद से 14 सालों में अलग-अलग इनपुट और सर्विस डिलीवरी की लागत में बढ़ोतरी के कारण पासपोर्ट फीस में बदलाव करना ज़रूरी हो गया था।

सरकार ने हाल ही में ‘पासपोर्ट नियम, 1980’ में संशोधन करके पासपोर्ट फीस में बदलाव किया है। इसके तहत, 36 पेज वाले सामान्य नए पासपोर्ट के लिए आवेदन शुल्क 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया गया है। नए नियम एक जुलाई, 2026 से लागू हो गए हैं।

मंत्री ने कहा, पासपोर्ट और उससे जुड़ी सेवाएं देने की लागत, कामकाज की ज़रूरतों और सेवा देने के तरीकों में सुधार की व्यापक समीक्षा के बाद समय-समय पर पासपोर्ट फीस में बदलाव किया जाता है। राज्य मंत्री ने बताया कि पासपोर्ट फीस में 1971, 1980, 1993, 2002 और 2012 में बदलाव किया गया था और अब 2026 में बदलाव किया गया है।

सरकार ने कहा है कि पासपोर्ट सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, जिनमें अपग्रेडेड पासपोर्ट सेवा प्रोग्राम वर्ज़न 2.0 और ई-पासपोर्ट शामिल है। इससे पासपोर्ट सेवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा, कार्यक्षमता बेहतर हुई है।

अन्य प्रश्न के उत्तर में कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट के लिए अमेरिका से मिली शर्तों के साथ प्रतिबंधों से छूट 26 अप्रैल को खत्म हो गई है। सरकार इस घटनाक्रम के असर से निपटने के लिए संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रही है।

मंत्री ने कहा कि चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट की योजना अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण के लिए बेहद ज़रूरी कनेक्टिविटी देने के साथ ही मध्य एशिया के साथ भारत के व्यापार और आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के मकसद से बनाई गई थी।

भारत सरकार की कंपनी, इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी, इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल चाबहार फ्री जोन (आइपीजीसीएफजेड) के जरिये 2018 से इस बंदरगाह का संचालन कर रही है।

मंत्री ने कहा, “13 मई 2024 को इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड और ईरान के पोर्ट्स एंड मैरीटाइम आर्गनाइज़ेशन के बीच हुए करार की शर्तों के अनुसार, भारत ने इस प्रोजेक्ट के लिए 12 करोड़ अमेरिकी डालर की अपनी वित्तीय प्रतिबद्धता पूरी कर ली है।

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