डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्याज की कीमतों की तपिश पहले भी दिल्ली की सत्ता को हिला चुकी है। लिहाजा, इस बार कीमतें चढ़ते ही समुचित उपलब्धता के लिए भंडारण के इंतजाम चाकचौबंद किए गए हैं।
उपभोक्ता मामले की सचिव निधि खरे ने बताया कि इस वर्ष पहली बार केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी) को बेहतर शेल्फ लाइफ सुनिश्चित करने के लिए भंडारण का जिम्मा दिया गया है।
लिहाजा, केंद्र का प्याज का बफर स्टाक ‘अच्छी’ गुणवत्ता का है। खरे ने उन रिपोर्टों का खंडन किया, जिसमें कहा गया था कि सरकार द्वारा बनाए गए 1.21 लाख टन प्याज बफर का 30 प्रतिशत सड़ गया है। ऐसा कुछ नहीं हुआ है। इनकी गुणवत्ता अच्छी है।
सीडब्ल्यूसी को सौंपी स्टॉक की जिम्मेदारी
पिछले वर्षों के विपरीत जब प्याज का बफर व्यापारियों के पास रखा जाता था, इस बार इसकी जिम्मेदारी सीडब्ल्यूसी को सौंपी गई, जिसमें एक तीसरी पार्टी नियमित अंतराल पर स्टॉक की गुणवत्ता का आकलन कर रही है।
प्याज के भंडारण के पीछे के विज्ञान को समझाते हुए निधि खरे ने कहा कि इस सब्जी में 90 प्रतिशत पानी होता है और यह कटाई के बाद तीन महीने तक अपनी गुणवत्ता बनाए रखती है।
इसके बाद यह हर महीने सिकुड़ जाती है क्योंकि पानी सूखता जाता है। सड़न की मात्रा भंडारण की स्थिति व वेंटिलेशन पर निर्भर करती है।
इस वर्ष प्याज की रिकवरी 72 प्रतिशत होने का अनुमान है, जो 2022 में 49 प्रतिशत, 2023 में 54 प्रतिशत और 2024 में 63 प्रतिशत से बढ़ी है। प्याज को नाफेड और एनसीसीएफ जैसी एजेंसियों के माध्यम से खरीदा जाता है।
कांदा एक्सप्रेस से कीमतों में कमी
बफर स्टाक को “कांदा एक्सप्रेस” के माध्यम से दिल्ली, चेन्नई, मदुरै, एर्नाकुलम और गुवाहाटी में बड़े पैमाने पर भेजा जा रहा है। शुक्रवार को 453 टन प्याज दिल्ली पहुंची।
इस कदम से दिल्ली-एनसीआर और आसपास के शहरों में आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है और कीमतों पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी, जिसमें खुदरा दरों में गिरावट एक सप्ताह के भीतर दिखाई देने की संभावना है।
उपभोक्ता मामले सचिव निधि खरे ने बताया, ‘पहला कांदा एक्सप्रेस, जिसमें 21 वैगनों में 453.65 टन प्याज है, सुबह राष्ट्रीय राजधानी पहुंचा।’
नासिक में संग्रहीत प्याज को दिल्ली-एनसीआर में 35 रुपये प्रति किलोग्राम की सब्सिडी दर पर बेचा जाएगा। कुछ स्टाक को चंडीगढ़, लुधियाना और जम्मू जैसे आसपास के शहरों में भी भेजा जाएगा।
खरीफ, रबी फसल का दृष्टिकोण सकारात्मक
प्याज की खरीफ फसल का दृष्टिकोण भी आशाजनक है, क्योंकि अलनीनो का डर अब समाप्त हो गया। खरे ने प्याज की रबी फसल पर अलनीनो के प्रभाव की चिंताओं को दूर किया।
सिंचाई में सुधार हुआ व प्रमुख जलाशयों में जल स्तर दुरुस्त है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में खुदरा प्याज की कीमतें गुरुवार को 88 प्रतिशत बढ़कर 62 रुपये प्रति किलो हो गईं, जो एक वर्ष पहले 33 रुपये प्रति किलो थी।
भारत में औसत खुदरा मूल्य 46.58 रुपये प्रति किलो था, जबकि उसी दिन थोक दर 38.29 रुपये प्रति किलो थी। कीमतों में वृद्धि के बावजूद आगामी महीनों में घरेलू मांग पूरी करने के लिए प्याज की उपलब्धता सहज-सुलभ है।
इसका समर्थन 2025-26 के लिए 307.37 लाख टन उत्पादन के अनुमान से है, जो पिछले वर्ष 307.67 लाख टन के बराबर है।
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