डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमर वाटिका सोमवार को बस्तर की उस लंबी और रक्तरंजित लड़ाई की मौन गवाह बन गई, जिसमें पिछले 25 वर्षों में 1,900 से अधिक जवानों ने अपने प्राण न्योछावर किए। माओवादी हिंसा के खात्मे और बस्तर में शांति लौटने के बाद पहली बार यहां पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कुछ क्षणों के लिए स्मारक के सामने भावुक हो गए। उनके साथ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी मौजूद थे।
शाह ने अमर वाटिका का दौरा किया
अमर वाटिका में अंकित बलिदानी जवानों के नामों के सामने वातावरण अचानक गंभीर हो उठा। शाह ने पुष्पचक्र अर्पित किया, सिर झुकाया और फिर औपचारिक मंच से उतरकर सीधे उन परिवारों के बीच जाकर बैठ गए, जिन्होंने इस संघर्ष में अपने बेटे, पति और पिता खोए हैं।बीजापुर हमले में बलिदान हुए जवान कालेंद्र प्रसाद नायक और पवन कुमार मंडावी के स्वजन से बातचीत के दौरान माहौल भावुक हो गया।
शाह ने स्वजन का हाथ पकड़कर कहा कि देश उनके बलिदान को कभी नहीं भूलेगा। शाह ने कहा कि बस्तर में शांति, सुरक्षा और विकास की नींव जवानों के बलिदान पर खड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि माओवादी हिंसा के खिलाफ लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है और बस्तर विकास के नए अध्याय की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जवानों का बलिदान छत्तीसगढ़ की सामूहिक स्मृति में हमेशा जीवित रहेगा।
1,900 से अधिक जवान बलिदान
वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद बस्तर में माओवादी ¨हसा के विरुद्ध चला अभियान देश के सबसे लंबे आंतरिक सुरक्षा अभियानों में शामिल रहा। पिछले ढाई दशक में 1,900 से अधिक जवान बलिदान हुए। कई हमलों में एक साथ बड़ी संख्या में जवानों ने जान गंवाई। अमर वाटिका उन्हीं बलिदानों की स्मृति में बनाया गया स्मारक है, जहां हर नाम बस्तर की एक कठिन लड़ाई की कहानी कहता है।
बस्तर की लड़ाई: बड़े हमले और बलिदान
2007, रानीबोदली (दंतेवाड़ा): माओवादी हमले में 55 जवान बलिदान
2010, ताड़मेटला: सीआरपीएफ के 76 जवान बलिदान
2017, बुरकापाल (सुकमा): 25 सीआरपीएफ जवान बलिदान
2021, टेकलगुड़ेम (बीजापुर): 22 जवान बलिदान