पीटीआई, नई दिल्ली। म्यांमार ने भारत को आश्वासन दिया है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत की सुरक्षा के खिलाफ नहीं होने देगा। दोनों पक्ष साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने और परिचालन संबंधी समन्वय बढ़ाने पर भी सहमत हुए हैं।
दोनों देशों के बीच यह सहमति राष्ट्रीय स्तर की 23वीं बैठक के दौरान बनी। दो दिनों तक चली यह बैठक बुधवार को संपन्न हुई।
सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि भारत-म्यांमार सीमा पर मौजूदा सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करते हुए दोनों पक्षों ने इलाके में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने के महत्व को दोहराया।
दोनों देशों ने कालादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट परिवहन परियोजना और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग को पूरा करने की दिशा में मिलकर काम करने पर भी विचार-विमर्श किया।
गृह सचिव गोविंद मोहन की अगुआई में भारतीय पक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि नई दिल्ली की ‘पड़ोसी पहले’, ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘महासागर’ (क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) नीतियों में म्यांमार एक अहम स्थान रखता है।
बातचीत मुख्य रूप से द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग पर केंद्रित रही। इसमें द्विपक्षीय वार्ता तंत्र के तहत हुई प्रगति की समीक्षा भी की गई।
दोनों पक्षों ने आतंकवाद, उग्रवाद, मादक पदार्थों की तस्करी, हथियारों की तस्करी, मानव तस्करी, वन्यजीवों की तस्करी, साइबर अपराध और अन्य संगठित अपराध सहित अंतरराष्ट्रीय अपराधों से निपटने में सहयोग पर चर्चा की।