• Sun. Nov 1st, 2026

24×7 Live News

Apdin News

मनीज़ा बख़्तारी: अफ़ग़ानिस्तान की राजनयिक जिन्होंने तालिबान शासन में भी नहीं छोड़ा पद, एक कमरे से चला रही हैं दूतावास

Byadmin

Nov 1, 2026


ManizhaBakhtari

इमेज कैप्शन, अफ़ग़ानिस्तान की राजनयिक मनीज़ा बख़्तारी ने तालिबान की ओर से पद छोड़ने की मांग मानने से इनकार कर दिया

प्रकाशित

पढ़ने का समय: 7 मिनट

साल 2021 में जब अफ़ग़ानिस्तान में तत्कालीन राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी की सरकार गिर गई और तालिबान ने सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया तो तालिबान अधिकारियों ने मनीज़ा बख़्तारी से अपना पद छोड़ने के लिए कहा.

लेकिन ऑस्ट्रिया में अफ़ग़ानिस्तान की राजदूत मनीज़ा बख़्तारी ने तालिबान की यह मांग मानने से इनकार कर दिया. इसी वजह से उन्हें ‘आख़िरी राजदूत’ भी कहा जाता है.

बीबीसी न्यूज़ के साथ एक इंटरव्यू में मनीज़ा बख्तारी ने बताया कि साल 2021 में जब अफ़ग़ानिस्तान की लोकतांत्रिक सरकार गिर गई और तालिबान सत्ता में आया तो वह क़रीब 24 घंटों तक बहुत परेशान रहीं. इस दौरान वे लगातार सोचती रहीं कि अब उन्हें क्या करना चाहिए.

वह कहती हैं, “जिस समूह को हम एक दिन पहले तक चरमपंथी कहते थे, वही अब देश चला रहा था.”

‘मुझे चुनी हुई सरकार ने भेजा, मैं पद क्यों छोड़ूं’

Taliban in Afghanistan 1996

इमेज कैप्शन, साल 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के समय मनीज़ा बख़्तारी ऑस्ट्रिया में अफ़ग़ानिस्तान की राजदूत थीं

मनीज़ा बख़्तारी के मुताबिक़, उन्हें लगा कि महिला होने की वजह से तालिबान सरकार उन्हें ऑस्ट्रिया में अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत के पद से हटाना चाहेगी.

By admin