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‘मैं वापस आऊंगा’ के पीछे की कहानी, लेखिका की असल ज़िंदगी से कितनी मेल खाती है

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Aug 16, 2026


बीबीसी उर्दू की संवाददाता शुमाइला ज़ाफ़री के साथ वीडियो कॉल पर फ़िल्म मैं वापस आऊंगा की लेखिका नयनिका मेहतानी ने बात करके अपनी स्मृतियां साझा कीं
इमेज कैप्शन, बीबीसी उर्दू की संवाददाता शुमाइला ख़ान के साथ वीडियो कॉल पर फ़िल्म मैं वापस आऊंगा की लेखिका नयनिका मेहतानी ने अपनी स्मृतियां साझा कीं

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पढ़ने का समय: 5 मिनट

1947 के बंटवारे ने जिस तरह लाखों परिवारों को दो मुल्कों में बांट दिया था, उसी त्रासदी का असर फ़िल्म लेखिका नयनिका मेहतानी के परिवार पर भी पड़ा.

अपने बिखरे हुए परिवार और बंटवारे से जुड़ी अनगिनत कहानियों से प्रेरित होकर उन्होंने निर्देशक इम्तियाज़ अली के साथ फ़िल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ लिखी है.

बंटवारे से पहले नयनिका का परिवार पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा जिले के भेरा इलाके में रहता था. आज भी उनके कुछ रिश्तेदार सरगोधा के गांव सालम में बसे हुए हैं.

बीबीसी उर्दू की संवाददाता शुमाइला ख़ान ने इस फ़िल्म की लेखिका नयनिका मेहतानी से बात की, जिन्होंने अपने नाना-नानी, दादा-दादी के जीवन और बंटवारे के बाद उनकी स्मृतियों से प्रेरणा लेकर यह फ़िल्म लिखी.

नयनिका का कहना है कि भेरा में "सान्या दी हवेली" उनके परिवार की पहचान थी, इस इलाके का बीबीसी ने दौरा किया
इमेज कैप्शन, नयनिका का कहना है कि भेरा में ‘सान्या दी हवेली’ उनके परिवार की पहचान थी, इस इलाके का बीबीसी ने दौरा किया

नयनिका बताती हैं कि भेरा में ‘सानियों का मोहल्ला’ और वहां स्थित ‘सान्या दी हवेली” उनके परिवार की पहचान थी. उसी हवेली में उनके पूर्वजों की कई पीढ़ियां रहीं और वहीं उनका बचपन बीता.

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