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यूपीआई पेमेंट को लेकर इस विधेयक पर छिड़ी बहस, अमेरिकी दबाव का क्यों लग रहा आरोप

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Aug 8, 2026


लोकसभा में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट संशोधन विधेयक छह अगस्त को पारित हुआ, जिसका विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं (प्रतीकात्मक तस्वीर)

इमेज स्रोत, Debajyoti Chakraborty/NurPhoto via Getty Images

इमेज कैप्शन, लोकसभा में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट संशोधन विधेयक छह अगस्त को पारित हुआ, जिसका विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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केंद्र सरकार ने साफ़ किया है कि यूपीआई से पेमेंट करने वाले यूज़र्स से किसी तरह का ट्रांजे़क्शन चार्ज नहीं लिया जाएगा. साथ ही यूपीआई पर होने वाले ज़्यादातर मर्चेंट ट्रांजेक्शन भी बिना किसी शुल्क के जारी रहेंगे.

सरकार ने कहा कि पर्शन-टू-पर्शन ट्रांजैक्शन पूरी तरह फ़्री रहेंगे. वहीं, अगर भविष्य में मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू किया जाता है, तो यह केवल कुछ चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर, एक तय सीमा से ऊपर और मामूली दर पर लगाया जाएगा.

यह दर डेबिट या क्रेडिट कार्ड के एमडीआर से काफ़ी कम होगी. ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ या एमडीआर लागू होने की स्थिति में भी यह शुल्क केवल एक तय सीमा से अधिक के लेनदेन पर ही लगाया जाएगा और ज़्यादातर लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा.

सरकार ने बताया कि टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026 के जरिए पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A में बदलाव का प्रस्ताव है.

संसद से बिल पास होने के बाद, एमडीआर लागू करना है या नहीं और इसकी दर क्या होगी, इसका फ़ैसला एनपीसीआई की अध्यक्षता वाली यूपीआई एंड सर्विस स्टीयरिंग कमिटी करेगी.

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