राजस्थान के भरतपुर जिले में स्टोन क्रेशर और खनन लीज तक जाने वाले रास्ते को लेकर हुए विवाद में पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की जान चली गई। वैर थाना क्षेत्र के भौंडा-रायपुर गांव में रविवार शाम क्रेशर प्लांट पर हुए हिंसक संघर्ष में गंभीर रूप से घायल भड़ाना ने दम तोड़ दिया। बयाना विधानसभा सीट से भाजपा विधायक रहे भड़ाना का राजनीतिक सफर किसान मोर्चा में संगठनात्मक जिम्मेदारी निभाने से शुरू हुआ था। वर्ष 2003 में भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतकर वह सदन पहुंचे, लेकिन गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान पार्टी से उनके रिश्ते बिगड़ गए। इसके बाद उन्होंने बसपा और कांग्रेस का भी दामन थामा। राजनीति में कई उतार-चढ़ाव देखने वाले भड़ाना बाद के वर्षों में खनन और क्रेशर कारोबार से जुड़ गए। अब क्रेशर प्लांट पर हुई हिंसक घटना में उनकी मौत के बाद उनके राजनीतिक सफर और कारोबारी विवाद एक बार फिर चर्चा में हैं। उनकी पत्नी कमलेश भड़ाना ने हमलावरों पर गोली चलाने का आरोप लगाया है, हालांकि गोली चलने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
किसान मोर्चा से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
अतर सिंह भड़ाना का राजनीतिक सफर संगठनात्मक जिम्मेदारी से शुरू हुआ था। दिसंबर 2001 में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें राजस्थान किसान मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया। संगठन में उनके काम को देखते हुए भाजपा ने वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में उन्हें भरतपुर जिले की बयाना सीट से उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव में भड़ाना ने 41,377 वोट हासिल किए और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी ध्रुवेंद्र सिंह को 19,405 मतों के अंतर से हराया। इस जीत के साथ वह पहली बार विधानसभा पहुंचे। वर्ष 2003 से 2008 तक विधायक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान वह विधानसभा की जन लेखा समिति (पीएसी) के सदस्य भी रहे। यह समिति सरकारी खर्च और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की समीक्षा करती है। भड़ाना ने इस समिति में रहते हुए सरकारी वित्तीय पारदर्शिता से संबंधित मामलों में भूमिका निभाई।
गुर्जर आरक्षण आंदोलन ने बदले राजनीतिक समीकरण
अतर सिंह भड़ाना की पहचान भाजपा के विधायक के रूप में बनी, लेकिन उनका राजनीतिक सफर एक ही पार्टी तक सीमित नहीं रहा। वर्ष 2007 में राजस्थान में गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान उनके और भाजपा के बीच मतभेद बढ़ गए। उस समय वसुंधरा राजे प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं और भड़ाना भाजपा के विधायक थे। आंदोलन के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री के रुख का विरोध करने और प्रस्ताव से जुड़े विवाद के बीच भाजपा ने भड़ाना को पार्टी से निलंबित कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद उनके राजनीतिक सफर में बदलाव आया और उन्होंने दूसरे दलों का रुख किया।
भाजपा के बाद बसपा में गए, फिर कांग्रेस में हुए शामिल
भाजपा से निलंबित होने के बाद अतर सिंह भड़ाना वर्ष 2008 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में शामिल हो गए। हालांकि, बसपा में उनका सफर अधिक समय तक नहीं चला। पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के बाद उन्हें बसपा से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद अक्टूबर 2008 में वह कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस ने वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में भड़ाना को भरतपुर जिले की नगर सीट से उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव में उनका मुकाबला भाजपा की उम्मीदवार अनीता से हुआ। अनीता को 22,942 वोट मिले, जबकि भड़ाना को 18,358 मत प्राप्त हुए। इस तरह उन्हें 4,584 वोटों से हार का सामना करना पड़ा।
इस चुनावी हार के बाद भड़ाना प्रत्यक्ष चुनावी राजनीति से कुछ दूर हो गए और अपने खनन तथा क्रेशर कारोबार पर ध्यान केंद्रित करने लगे। इस तरह उनका राजनीतिक जीवन भाजपा से शुरू होकर बसपा और कांग्रेस तक पहुंचा, जबकि वैर क्षेत्र में उनका क्रेशर व्यवसाय भी उनकी पहचान का हिस्सा बना रहा।
खनन और क्रेशर कारोबार को लेकर चल रहा था विवाद
राजनीति के अलावा अतर सिंह भड़ाना खनन और क्रेशर कारोबार से भी जुड़े हुए थे। भरतपुर जिले के वैर क्षेत्र में स्थित उनके क्रेशर प्लांट के संचालन और खनन लीज तक पहुंचने वाले रास्ते को लेकर ग्रामीणों तथा क्रेशर संचालक पक्ष के बीच करीब दो साल से विवाद चल रहा था। इस मुद्दे पर ग्रामीणों की ओर से विरोध प्रदर्शन और धरने भी दिए गए थे।
रविवार शाम करीब 6:30 से 7 बजे के बीच क्रेशर परिसर में हिंसक घटना हुई। उस समय पहाड़ी पर मशीनों के जरिए खनन कार्य चल रहा था और भड़ाना भी मौके पर मौजूद थे। उनकी पत्नी कमलेश भड़ाना के आरोप के मुताबिक, 70 से 80 लोग वहां पहुंचे और उनके पति सहित मौके पर मौजूद अन्य लोगों पर हमला कर दिया। इस घटना में भड़ाना गंभीर रूप से घायल हो गए।
वैर से जयपुर रेफर, एसएमएस अस्पताल में निधन
घटना के बाद गंभीर रूप से घायल अतर सिंह भड़ाना को वैर के उपजिला अस्पताल ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत गंभीर होने के कारण उन्हें जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल रेफर कर दिया गया। रविवार देर रात अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया। भड़ाना की पत्नी कमलेश भड़ाना ने आरोप लगाया है कि हमले के दौरान उनके पति पर गोली चलाई गई थी। हालांकि, अभी तक गोली चलने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस को जांच में यह स्पष्ट करना होगा कि घटना के दौरान संघर्ष किन परिस्थितियों में हुआ, भड़ाना को किस तरह की चोटें आईं और उनकी मौत किन चोटों के कारण हुई। क्रेशर प्लांट के संचालन और खनन लीज तक पहुंचने वाले रास्ते को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद भी जांच के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।