डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने विकास परियोजनाओं में अड़ंगा लगाने वाली याचिकाओं पर सवाल उठाया है। कहा कि अगर इसी तरह से परियोजनाओं के विरुद्ध न्यायालयों में याचिकाएं दायर होती रहीं तो तो देश की तरक्की कैसे होगी, वह आगे कैसे बढ़ेगा।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्या बागची की पीठ ने पूछा, देश की किसी एक परियोजना का नाम बताएं जिसका तथाकथित पर्यावरणविदों ने स्वागत किया हो। पीठ ने यह टिप्पणी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) पश्चिमी क्षेत्र की पीठ के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए की।
मामले में एनजीटी ने गुजरात के पीपावा बंदरगाह के विकास और आधुनिकीकरण को अनुमति दिए जाने के विरुद्ध दायर याचिका को अस्वीकार कर दिया है। एनजीटी के समक्ष पेश याचिका में बंदरगाह के विकास से क्षेत्रीय पर्यावरण पर खतरा बढ़ने की आशंका जताई गई थी।
एनजीटी के फैसले के विरोध में पर्यावरणविदों ने सुप्रीम कोर्ट आकर आदेश रद किए जाने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, इस तरह की याचिकाओं का उद्देश्य विकास को रोकना होता है। यह बड़ी समस्या है। पूछा, ऐसे में देश तरक्की कैसे करेगा।
पीठ ने क्या स्पष्ट
लेकिन पीठ ने स्पष्ट किया कि उसे पर्यावरण से जुड़ी दिक्कतों की भी पर्याप्त चिंता है और जिन भी चीजों से पर्यावरण को नुकसान हो रहा होगा उनकी रोकथाम के लिए पूरी कोशिश की जाएगी। शीर्ष न्यायालय ने कहा, देश में विकास जरूरी है। बेहतर होता कि पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सकारात्मक सुझावों के साथ न्यायालय में आते और परियोजना से जुड़े खतरों को कम या खत्म करने के लिए उन्हें देते।
ऐसे में विकास कार्य भी जारी रहते और पर्यावरण की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती। कहा, विकास परियोजनाओं को रोकने के प्रयास कभी नहीं होने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, इस मामले में एनजीटी ने काफी विस्तृत आदेश दिया है, इस आदेश की समीक्षा के लिए याचिकाकर्ता को एनजीटी के समक्ष पुनर्विचार प्रार्थना पत्र देना चाहिए था। प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने एनजीटी से इस याचिका पर विचार करने के लिए कहा है।