डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (एफआईआर) को लेकर सियासी घमासान के बीच केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर जनता को भ्रमित कर रहा है। यादव ने दावा किया कि विपक्ष का मकसद लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिये सरकार को चुनौती देना नहीं, बल्कि विदेशी दखलंदाजी के जरिये देश में सत्ता परिवर्तन कराना है।
एक विशेष साक्षात्कार में यादव ने बिहार में एफआईआर के दौरान दर्ज कराई गई आपत्तियों का उदाहरण देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के संदर्भ में विपक्षी दलों की ओर से केवल दो आपत्तियां दर्ज कराए जाने की बात सामने आई है। उनके मुताबिक, जमीनी स्थिति जानने के बावजूद विपक्ष इस प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैला रहा है।
यादव की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब एसआईआर के विरोध में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ आंदोलन चला रहा है। गठबंधन ने इस मुद्दे पर एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली करने की घोषणा की है। इसके अलावा वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मौजूदा आंदोलन को सत्ता परिवर्तन की लड़ाई बताया था और ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी बांग्लादेश के जेन-जी नीत आंदोलन का उल्लेख किया था।
‘मतदाता का नाम हटाने से पहले मिलता है जवाब देने का मौका’
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) किसी मतदाता का नाम मनमाने ढंग से सूची से नहीं हटा सकते। नाम हटाने से पहले संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है। उन्होंने दावा किया कि एफआईआर की प्रक्रिया चुनाव आयोग के कानूनों और नियमों के तहत होती है।
यादव ने कहा कि मतदाता सूची का विशेष सघन पुनरीक्षण देश के लिए नई प्रक्रिया नहीं है। उनके अनुसार, आजादी के बाद अब तक आठ बार एफआईआर हो चुका है और मौजूदा प्रक्रिया नौवीं है। उन्होंने कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव में हार के बाद ही उसे संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर संदेह क्यों होने लगता है।
‘प्रदर्शन पर रोक नहीं, अनुमति लेना जरूरी’
विरोध-प्रदर्शनों को लेकर यादव ने कहा कि सरकार ने प्रदर्शन के लिए जगह उपलब्ध कराई है और अनुमति मिलने पर कोई भी समूह अपनी बात रख सकता है। उन्होंने सवाल किया कि जब प्रदर्शन की अनुमति दी जा रही है, तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाने का आरोप कैसे लगाया जा सकता है।
संविधान के अनुच्छेद 19 का उल्लेख करते हुए यादव ने कहा कि भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार निलंबित नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। अनुमति मिलने पर संबंधित समूह प्रदर्शन कर सकता है।
(समाचार एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ)