जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर चुने हुए शिक्षकों से मुलाकात में प्रधानमंत्री ने बच्चों में पनपने वाली नशे की आदत और बढ़ते स्क्रीन टाइम के प्रति आगाह किया। पीएम मोदी ने इस दौरान शिक्षकों को सलाह दी कि वह बच्चों को सिलेबस से बाहर निकल उसके व्यवहार और आदतों पर भी ध्यान दें।
इस साल 82 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। अपने आवास पर शुक्रवार शाम को हुई मुलाकात में प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षकों को बच्चों के शैक्षणिक प्रदर्शन से परे जाकर उनके व्यवहार और दैनिक जीवन पर भी ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने पारंपरिक संयुक्त परिवार व्यवस्था में कमी के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि बच्चों के जीवन में शिक्षकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। प्रधानमंत्री ने नशे की समस्या के बारे में चर्चा करते हुए शिक्षकों से बच्चों में होने वाले बदलावों के प्रति सतर्क रहने, इसके कारणों का पता लगाने और ऐसे बच्चों को इस लत से उबरने में मदद करने का विशेष प्रयास किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बचपन की मासूमियत को सुरक्षित रखना एक महत्वपूर्ण भूमिका है और शिक्षक यह भूमिका निभा सकते हैं। बच्चों में एक समान मूल स्वभाव और जिज्ञासा होती है और यदि शिक्षक इस जिज्ञासा को बढ़ावा और उचित दिशा दें, तो वे उनके विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
स्क्रीन टाइम आज हर किसी के लिए बड़ी समस्या है। बच्चों में इसकी लत ज्यादा चिंताजनक है। पीएम ने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे अभिभावकों से इस बारे में बात करें कि उनके बच्चे स्क्रीन पर कितना समय बिताते हैं और क्या वे देर रात तक मोबाइल फोन का उपयोग करते रहते हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चे खेलकूद, शारीरिक गतिविधियों और रचनात्मक गतिविधियों में रुचि विकसित करके धीरे-धीरे स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग से बाहर निकल सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बारे में चर्चा करते हुए बच्चों को कक्षा से बाहर ले जाकर उन्हें वास्तविक दुनिया के कौशल और कार्य के विभिन्न रूपों से जोड़ने के महत्व पर बल दिया। बातचीत के क्रम में ही उन्होंने एक शिक्षिका द्वारा छात्रों को सिखाए जा रहे पब्लिक स्पीकिंग को लेकर भी बात की।
शिक्षिका से सवाल-जवाब के इस क्रम में शिक्षिका भी पीएम को देखकर थोड़ा हिचक रही थी। बाद में उसने बताया भी कि वह उनका व्यक्तित्व और प्रभाव को देखकर थोड़ी घबरा गई थीं। इस पर फिर पीएम ने पूछा क्या औरा नहीं होना चाहिए। शिक्षिका ने कहा कि होना चाहिए। पीएम की शिक्षिका के साथ यह बातचीत जब हो रही थी, उस दौरान कई बार जोरदार ठहाके लगे।