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सतलुज महज़ फ़िल्म नहीं बल्कि वो नदी है जिसने कई सभ्यताओं को बनते और मिटते देखा

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Jul 20, 2026


सतलुज नदी

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, सतलुज तिब्बत के निर्जन विस्तार से हिमालय की चट्टानों को काटकर पंजाब के मैदानों से पाकिस्तान में प्रवेश करती है

“सतलुज की हवा,

जो मेरे गाँव के खेतों से होकर गुज़रती है,

और याद दिलाती है उन सब की,

जो इस माटी के लिए लड़े और मिट गए.”

क्रांतिकारी कवि लालसिंह दिल की मशहूर पंजाबी कविता “सतलज दी हवा” का यह हिस्सा बताता है कि एक स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म से हटाई गई फ़िल्म ने ही उस नदी की ओर ध्यान नहीं खींचा, जो हिमालय से भी पुरानी भूगर्भीय स्मृतियों, लुप्त नदी-मार्गों, सभ्यताओं, साम्राज्यों, युद्धों और विभाजित राष्ट्रों की कहानी अपने साथ बहाती रही है, इससे पहले भी वह लोगों का ध्यान खींचती रही है.

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