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‘सिर्फ शराबबंदी से नहीं रुक सकतीं जहरीली शराब की घटनाएं’, सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों सरकारों को सुझाए कई उपाय

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Sep 19, 2026


एएनआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि गुजरात की दशकों पुरानी शराबबंदी की व्यवस्था मेथनॉल मिली जहरीली शराब से होने वाली घटनाओं को रोकने में नाकाम रही है। ऐसी कम से कम 10 बड़ी घटनाओं में 600 से अधिक मौतें हुई हैं।

ये घटनाएं बताती हैं कि सिर्फ शराबबंदी से जहरीली शराब की घटनाएं नहीं रुक सकती। शीर्ष अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ऐसी घटनाओं रोकने के लिए कई उपाय भी सुझाए।

जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने यह बात महाराष्ट्र विष नियम, 1972 के नियम 18ए और 18बी को रद करते हुए कही। ये नियम मेथनाल की खरीद व उन्हें रखने को विनियमित करते थे और गैर-औषधि निर्माताओं को उनकी ब्रिक्री से पहले उसमें रंग और कड़वाहट मिलाना आवश्यक बनाते थे।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि गुजरात के अनुभव से पता चलता है कि शराब पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने से गैरकानूनी शराब का धंधा भूमिगत हो सकता है, जिससे अनियंत्रित व जानलेवा शराब का प्रचलन बढ़ जाता है।

शीर्ष अदालत ने लाइसेंस धारकों के सत्यापन, मेथनॉल के इस्तेमाल पर नजर रखने, स्टाक का मिलान, इस्तेमाल न हुए मेथनाल वापस करना, परिवहन व भंडारण पर कड़े नियंत्रण, इसके परिवहन के लिए समर्पित टैंकर और छेड़छाड़-रोधी सील जैसे कड़े सुरक्षा उपायों का सुझाव दिया।

कोर्ट ने फैसले में कहा, चूंकि शराब राज्य में बनती है और बाहर से भी लाई जाती है, इसलिए इसे लागू करने के लिए राज्य की सीमा पर कड़ी निगरानी होनी चाहिए।

साथ ही राज्य के अंदर शराब की खरीद, बनाने, परिवहन, बिक्री और इस्तेमाल से जुड़े पूरक कानूनों को लागू करना भी नकली शराब से होने वाली दुखद घटनाओं को रोकने में बहुत जरूरी साबित होगा।

राज्य पुलिस, प्रतिबंध लागू करने वाले विभाग व उत्पाद कर विभाग के साथ मिलकर देसी शराब बनाने वालों की पहचान कर सकती है और उन पर कार्रवाई कर सकती है।

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