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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने प्रदर्शन ख़त्म करने के बाद सोमवार को पहली बार प्रेस कॉन्फ़्रेंस की. इस दौरान सीजेपी ने दावा किया है कि प्रदर्शन ख़त्म होने के बाद पुलिस की ओर से स्टूडेंट्स को निशाना बनाया जा रहा है.
सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास और अन्य सदस्यों ने वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के साथ मिलकर प्रेस कॉन्फ़्रेंस की है.
सीजेपी ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ पुलिस कार्रवाई न करने के ‘समझौते का उल्लंघन’ हो रहा है.
वहीं कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके बताया है कि दिल्ली और बिहार में स्टूडेंट्स को चिन्हित करके उन्हें निशाना बनाया जा रहा है.
नीट पेपर लीक मामले के बाद सीजेपी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रही थी.
बीते शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े और अन्य मांगों को मानने के बाद सीजेपी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन ख़त्म कर दिया था.
सीजेपी ने क्या आरोप लगाए?
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शनिवार 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के बाद सीजेपी के नेताओं ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह तीसरे दौर की बातचीत की थी.
इस बातचीत में सीजेपी की अन्य मांगों, जैसे आत्महत्या करने वाले नीट अभ्यर्थियों के परिजनों को मुआवाज़ा देने और प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज न करने पर सहमति बनी थी.
सीजेपी ने कहा था कि प्रदर्शन के बाद पुलिस कार्रवाई न किए जाने पर भी सहमति बनी थी.
सीजेपी ने चेतावनी दी है कि अगर यह कार्रवाई नहीं रोकी गई तो उन्हें फिर से प्रदर्शन करना पड़ेगा.
सीजेपी ने मांग की है कि सरकार के साथ क़ानूनी मामलों को लेकर हुआ लिखित समझौता मंगलवार तक साझा किया जाए.
पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “हम देख रहे हैं कि प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ पुलिस कार्रवाई नहीं करने के समझौते का पूरी तरह उल्लंघन हो रहा है. बिहार और बंगाल में सैकड़ों छात्रों को गिरफ़्तार किया गया है, जबकि दिल्ली और दूसरे राज्यों में सैकड़ों छात्रों पर नज़र रखी जा रही है और उन्हें परेशान किया जा रहा है.”
उन्होंने आगे लिखा, “दिल्ली से कई ऐसी ख़बरें भी सामने आ रही हैं कि प्रदर्शनकारियों तक ज़रूरी सामान पहुंचाने में मदद कर रहे वॉलंटियर्स को हिरासत में लिया जा रहा है.”
रांका ने कहा, “हम मांग करते हैं कि प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज सभी एफआईआर तुरंत वापस ली जाएं, छात्रों को रिहा किया जाए और आगे कोई नई एफआईआर दर्ज न की जाए. यह बात दिल्ली पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियों और बीजेपी के सहयोगी राज्यों की पुलिस पर भी लागू हो. अगर ऐसा नहीं हुआ, तो हमें फिर से प्रदर्शन पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.”
उन्होंने यह भी कहा कि क़ानूनी मामलों को लेकर हुआ लिखित समझौता और भारत सरकार के साथ तय समय-सीमा मंगलवार तक साझा की जाए.
दूसरी ओर एनएसयूआई की नेता ऋचा सिंह ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में दावा किया कि “बिहार में जिस तरह से पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ बर्बरता की, वह बेहद निंदनीय है. पटना यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष शांतनु शेखर समेत हमारे एनएसयूआई के कई साथियों को हिरासत में लिया गया और उनके साथ मारपीट की गई.”
“कई महिला साथियों के यहां रात दो बजे पुलिस ने दबिश दी और घर की तलाशी ली गई. हमारे ऐसे सैकड़ों साथी हैं, जिनके परिजनों को यह नहीं पता कि उनके बच्चे कहां हैं और उन्हें कहां पर रखा गया है. इतना ही नहीं, प्रदर्शन में जाने वाली महिलाओं को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है. अभद्र टिप्पणियां की जा रही हैं.”
कपिल सिब्बल किस तरह की करेंगे मदद?
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अब सोमवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीजेपी ने दावा किया है कि देश के कई हिस्सों में पुलिस स्टूडेंट्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रही है और उन पर क़ानूनी मुक़दमे लगा रही हैं.
सीजेपी की सदस्य रत्ना ने बताया कि सीजेपी में जितने लोग हैं, वो 25 जुलाई से वकीलों के संपर्क में हैं और जहां जहां स्टूडेंट्स के ख़िलाफ़ एफ़आईआर हुई हैं, वहां उनकी मदद की जा रही है
“असम में सात-आठ एफ़आईआर हुई हैं, एक वकील को भी हिरासत में लिया गया. इस पर वहां वकील मदद कर रहे हैं. कोलकाता में 11 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है जिनमें 10 मुस्लिम समुदाय से हैं, इसे देखें तो एक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है.”
कपिल सिब्बल ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनों के दौरान फ़ैशियल रिकग्निशन के तहत जिन जिन प्रदर्शनकारियों को मार्क किया था उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करेगी.
उन्होंने कहा, “दिल्ली पुलिस इसमें भी सांप्रदायिक दृष्टिकोण लेकर आएगी. मेरी सोच है कि हिंदू-मुस्लिम हर जगह किया जाएगा. यह हिंदुस्तान में हमें होने नहीं देना है. ये समुदाय, धर्म, जाति से ऊपर उठकर हिंदुस्तान के सुधार के लिए आंदोलन है. मेरी भूमिका यही है कि मैं इस आंदोलन को बाहर से क़ानूनी रूप से समर्थन करूं.”
कपिल सिब्बल ने कहा है कि सीजेपी एक ढांचा बनाएगी और जानेगी कि देश के किस हिस्से में किस प्रदर्शनकारी के ख़िलाफ़ कार्रवाई हुई है.
कपिल सिब्बल ने कहा है कि वो अपनी ओर से एक करोड़ रुपये क़ानूनी सहायता में मदद करने के लिए देंगे. उन्होंने कहा कि वो बाहर से सीजेपी का समर्थन करेंगे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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